CM हाउस घेराव में गरजे आंदोलनकारी, बोले – झारखंड बनाने वालों की आवाज क्यों दबा रही सरकार?
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास घेरने पहुंचे झारखंड आंदोलनकारियों और पुलिस-प्रशासन के बीच बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली. राजधानी में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को रोक दिया गया

Ranchi : अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास घेरने पहुंचे झारखंड आंदोलनकारियों और पुलिस-प्रशासन के बीच बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली. राजधानी में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर आंदोलनकारियों को रोक दिया गया, जिसके बाद उन्होंने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जताई. आंदोलनकारियों का कहना था कि जिन लोगों ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए वर्षों तक संघर्ष किया, आज उन्हीं की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने सम्मानजनक व्यवहार की मांग करते हुए सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया. वहीं आंदोलन के समर्थन में कई आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
बैरिकेडिंग पर भड़के आंदोलनकारी
मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे आंदोलनकारियों को सिद्धू-कानू पार्क के पास पुलिस ने रोक दिया. इस दौरान आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जमीन पर बैठने के लिए कहा गया, जिसे उन्होंने अपने सम्मान के खिलाफ बताया. उनका कहना था कि झारखंड आंदोलन के दौरान हजारों लोगों ने संघर्ष किया और कई लोगों ने बलिदान दिया. ऐसे में आंदोलनकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं और इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं.
पुलिस कार्रवाई और हिरासत को लेकर उठाए सवाल
आंदोलनकारी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों से रांची पहुंचे कई लोगों को रास्ते में ही रोक दिया गया. कुछ लोगों को हिरासत में लेने की भी बात कही गई. आंदोलनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इस पर रोक लगाना उचित नहीं है. नेताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है.
भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारी
आंदोलन को और धार देने के लिए 17 आंदोलनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि सरकार को उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उनका आरोप है कि लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर ज्ञापन और मांगपत्र दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आंदोलनकारियों ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन लंबे संघर्ष और बलिदान का परिणाम है. इसलिए राज्य निर्माण में भूमिका निभाने वाले लोगों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों और सम्मान की बात कर रहे हैं. आंदोलनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारियों की स्थिति बिगड़ने पर इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी.

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