झारखंड के केरेडारी क्षेत्र में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने NTPC के कोयला खदान में अपने समर्थकों के साथ प्रवेश कर लिया. तीर-धनुष के साथ खदान परिसर में पहुंचने की घटना ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया, बल्कि खनन कार्य भी प्रभावित हो गया. बताया जा रहा है कि कोयला ढुलाई को लेकर पहले किए गए प्रयासों में असफल रहने के बाद अब उत्पादन को बाधित करने की कोशिश की जा रही है. इस घटनाक्रम से मजदूरों में दहशत का माहौल है और परियोजना के संचालन पर सीधा असर पड़ा है. केरेडारी में चल रहे इस विवाद ने एक बार फिर उद्योग और स्थानीय राजनीति के टकराव को उजागर कर दिया है.
मजदूरों में फैला डर
सोमवार को योगेंद्र साव अपनी पत्नी निर्मला देवी और कुछ सहयोगियों के साथ NTPC की कोयला खदान पहुंचे और तीर-धनुष लेकर खदान के भीतर प्रवेश कर गए. उनके अचानक अंदर घुसने से वहां काम कर रहे मजदूर घबरा गए और सुरक्षा कारणों से खनन कार्य रोकना पड़ा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, साव बार-बार खदान के भीतर जाते रहे और फिर बाहर आकर धरने पर बैठ जाते थे. इस पूरे घटनाक्रम के कारण कोयले का उत्पादन बार-बार बाधित हुआ. खदान प्रबंधन का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है.
पहले ढुलाई रोकी, अब उत्पादन पर असर डालने की कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब योगेंद्र साव ने NTPC परियोजना के कामकाज को बाधित करने का प्रयास किया हो. इससे पहले उन्होंने रात के समय कोयला ढुलाई मार्ग पर दीवार खड़ी करवा दी थी, जिससे परिवहन पूरी तरह ठप हो गया था. जब प्रशासन ने ढुलाई बहाल करने के लिए दीवार हटाने की कोशिश की, तो साव मौके पर कुर्सी लगाकर बैठ गए और विरोध शुरू कर दिया. स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और समझाने के प्रयास असफल होने के बाद उन्हें जबरन हटाया गया. इसके बाद दीवार तोड़कर कोयला ढुलाई दोबारा शुरू कराई गई थी. अब ताजा घटना से साफ है कि आंदोलन का तरीका और तेज होता जा रहा है.

