PM मोदी ने फोन कर कहा ‘जोहार’, फिर अमित शाह का आया कॉल… चंदवा के ब्रज मोहन राम ऐसे बने ओडिशा के राज्यपाल
Bawal News के EXCLUSIVE इंटरव्यू में ब्रज मोहन राम ने अपने संघर्ष के दिनों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई बातचीत तक के अनुभव साझा किए।

Ranchi: कभी चुनाव प्रचार की जीप के लिए डीजल जुटाने की चिंता, तो कभी भाषण के कागज तैयार करने की जिम्मेदारी। कोई जीप चलाता था, तो कोई गांव-गांव घूमकर लोगों से संपर्क और बूथ की रणनीति बनाने में जुटा रहता था। साधन सीमित थे, लेकिन दोस्तों का हौसला बुलंद था। सबका एक ही सपना था—उनका अपना मित्र विधायक बने। चंदवा के ब्रज मोहन राम के राजनीतिक सफर की शुरुआत ऐसे ही संघर्ष और साथियों के भरोसे के बीच हुई थी। वक्त बदला, वे बिहार विधानसभा पहुंचे, तीन बार लोकसभा के सदस्य बने और अब ओडिशा के राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। Bawal News के EXCLUSIVE इंटरव्यू में ब्रज मोहन राम ने अपने संघर्ष के दिनों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई बातचीत तक के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्यपाल बनाए जाने की जानकारी मिलने से पहले प्रधानमंत्री का फोन आया था। पीएम मोदी ने ‘जोहार’ कहकर बातचीत शुरू की, परिवार का हालचाल जाना और बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। इसके बाद अमित शाह का फोन आया, जिसमें उन्हें ओडिशा के राज्यपाल बनाए जाने से संबंधित अधिसूचना की जानकारी दी गई।
किसान के बेटे का संघर्ष, भूखे पेट स्कूल जाने के दिन
ब्रज मोहन राम ने इंटरव्यू में अपने बचपन और पारिवारिक परिस्थितियों को याद किया। उन्होंने बताया कि वे एक किसान के बेटे हैं और उनका शुरुआती जीवन अभावों के बीच गुजरा। परिस्थितियां कई बार ऐसी रहीं कि उन्हें भूखे पेट स्कूल जाना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। मुश्किल हालात में शिक्षा जारी रखने के उनके संकल्प ने आगे की जिंदगी में भी उन्हें संघर्ष करने की ताकत दी।
एक किसान परिवार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों के बीच आगे बढ़ने की चुनौती थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय अपने रास्ते पर आगे बढ़ना जारी रखा। इंटरव्यू में उन्होंने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि जीवन में आई कठिनाइयों ने उन्हें संघर्ष करना और जमीन से जुड़े रहना सिखाया।
दोस्तों के साथ चुनाव प्रचार, किसी के जिम्मे डीजल तो किसी के जिम्मे भाषण
उनकी राजनीतिक यात्रा के शुरुआती दिनों में दोस्तों का साथ बेहद अहम था। चुनाव प्रचार के लिए किसी के जिम्मे भाषण के कागज तैयार करना था, तो कोई प्रचार की जीप के लिए डीजल जुटाता था। कोई खुद जीप चलाता था, तो कोई गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क करता और बूथ की रणनीति बनाता था।
संसाधन कम थे, लेकिन साथियों के भीतर उत्साह की कमी नहीं थी। सभी चाहते थे कि उनका मित्र ब्रज मोहन राम विधायक बने। यही अपनापन और साझेदारी उनके शुरुआती राजनीतिक सफर का आधार बना। समय के साथ उनका राजनीतिक दायरा बढ़ता गया और वे बिहार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने लोकसभा में भी अपनी जगह बनाई और तीन बार सांसद बने।
टिकट नहीं मिला, फिर भी संगठन का साथ नहीं छोड़ा
राजनीति में उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। ब्रज मोहन राम ने बताया कि कई बार विषम परिस्थितियां आईं और पार्टी की ओर से उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने संगठन के लिए काम करना जारी रखा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन उन्होंने संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने पर ध्यान दिया।
उनके मुताबिक, आज पार्टी ने उन पर बड़ी जिम्मेदारी के लिए भरोसा जताया है। ओडिशा के राज्यपाल का पद उनके लंबे राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय है। उनके इस सफर में विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का अनुभव शामिल है। अब संवैधानिक पद पर उनकी भूमिका पहले की राजनीतिक जिम्मेदारियों से अलग होगी, जहां संविधान के दायरे में रहकर राज्यपाल के दायित्वों का निर्वहन करना होगा।
PM मोदी ने ‘जोहार’ कहकर की बात, परिवार का भी जाना हालचाल
ब्रज मोहन राम ने राज्यपाल बनाए जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले प्रधानमंत्री का फोन आया। पीएम मोदी ने ‘जोहार’ कहकर बातचीत शुरू की और उनके परिवार का हालचाल जाना। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने उनकी वर्तमान जिम्मेदारी के बारे में जानकारी ली और बताया कि उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। ब्रज मोहन राम के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उनसे इस बात को फिलहाल अपने तक रखने को भी कहा।
इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का फोन आया। उन्होंने ब्रज मोहन राम को ओडिशा के राज्यपाल बनाए जाने से संबंधित अधिसूचना की जानकारी दी। इस तरह प्रधानमंत्री के फोन और गृह मंत्री की बातचीत के बाद उन्हें नई जिम्मेदारी के बारे में जानकारी मिली। इंटरव्यू में उन्होंने इस घटनाक्रम को अपने राजनीतिक जीवन के अहम अनुभवों में शामिल किया।
ओडिशा के विकास और नई जिम्मेदारी को लेकर क्या है योजना?
ब्रज मोहन राम ने बातचीत में ओडिशा के विकास को लेकर अपनी सोच और आगे की योजना पर भी चर्चा की। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन, राज्य की संस्थाओं के साथ समन्वय और विभिन्न विषयों को समझने से जुड़ी होगी। उन्होंने नई जिम्मेदारी को पार्टी की ओर से जताए गए भरोसे के रूप में देखा।
चंदवा में दोस्तों के साथ चुनाव प्रचार की जिम्मेदारियां संभालने से शुरू हुआ उनका सफर अब ओडिशा के राजभवन तक पहुंच चुका है। एक किसान परिवार में जन्म, भूखे पेट स्कूल जाने की यादें, राजनीति में टिकट नहीं मिलने के दौर और संगठन के लिए लगातार काम करने का अनुभव उनकी यात्रा के अहम हिस्से हैं।
Bawal News के EXCLUSIVE इंटरव्यू में ब्रज मोहन राम ने अपने अतीत को याद करने के साथ ही नई जिम्मेदारी और ओडिशा के विकास से जुड़े विषयों पर भी बात की। अब राज्यपाल के रूप में उनकी संवैधानिक भूमिका और राज्य के विकास को लेकर उनकी प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।

