Petrol-Diesel Crisis : तेल बचाने की अपील, सरकार ने लोगों से कहा- मेट्रो, कारपूल और EV अपनाएं
“पश्चिम एशिया तनाव और तेल कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार ने पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की है. लोगों से मेट्रो, कारपूल और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की सलाह दी गई है, जबकि देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है.”

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ने का आग्रह किया. मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा बचत अब केवल व्यक्तिगत जरूरत नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन गई है. सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए लोगों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है. मंत्रालय ने दावा किया कि देश में पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं.
“जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुजाता शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरत पड़ने पर ही निजी वाहनों का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि जहां संभव हो वहां मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का उपयोग किया जाए. इसके साथ ही कारपूलिंग को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत हो सके. मंत्रालय का मानना है कि अगर बड़े शहरों में लोग निजी वाहनों के बजाय साझा परिवहन अपनाते हैं तो तेल की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है.
इलेक्ट्रिक वाहनों और रेलवे पर जोर
मंत्रालय ने लोगों से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की भी अपील की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि आने वाले समय में EV ही ईंधन संकट और महंगे पेट्रोल-डीजल का सबसे बड़ा विकल्प बन सकते हैं. सरकार ने माल ढुलाई के लिए भी सड़क परिवहन के बजाय रेलवे को प्राथमिकता देने की सलाह दी है. अधिकारियों के अनुसार रेलवे के जरिए माल ढुलाई करने से डीजल की खपत कम होगी और लॉजिस्टिक लागत पर भी असर पड़ेगा. सरकार का मानना है कि ऊर्जा संकट से निपटने के लिए परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव जरूरी हैं.
“देश में ईंधन की कमी नहीं, घबराने की जरूरत नहीं”
सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि फिलहाल देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है. उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने पहले ही कई कदम उठाए हैं ताकि आम लोगों को ईंधन संकट का सामना न करना पड़े. मंत्रालय के मुताबिक देश का कच्चे तेल का भंडार पर्याप्त स्तर पर बना हुआ है और सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है. LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
LPG सिलेंडर की रिकॉर्ड डिलीवरी
मंत्रालय ने आंकड़े जारी करते हुए बताया कि पिछले तीन दिनों में 1 करोड़ 14 लाख बुकिंग के मुकाबले 1 करोड़ 26 लाख LPG सिलेंडर घरों तक पहुंचाए गए हैं. इसके अलावा कमर्शियल LPG की बिक्री भी 17 हजार टन से ज्यादा रही है. ऑटो LPG की खपत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में सप्लाई सिस्टम को मजबूत रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
वैश्विक संकट का भारत पर असर
मंत्रालय ने माना कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है. खासतौर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से देश पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. इसी वजह से सरकार अब ऊर्जा बचत और वैकल्पिक परिवहन को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुट गई है.


