भाकपा (माओवादी) के 18 से अधिक उग्रवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह, झारखंड में जल्द होगा औपचारिक सरेंडर
झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 18 से अधिक उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. बताया जा रहा है.

रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा एजेंसियों को एक और अहम सफलता मिलने की जानकारी सामने आई है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 18 से अधिक उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि इन सभी ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अगले कुछ दिनों में रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में इसकी औपचारिक घोषणा की जा सकती है. हालांकि, इस संबंध में झारखंड पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. बीते कुछ महीनों में कई बड़े माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी, लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन और जंगलों में सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी के कारण संगठन पर दबाव बढ़ा है. ऐसे में आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसे झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
कोल्हान क्षेत्र के उग्रवादियों की संख्या सबसे अधिक
सूत्रों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश उग्रवादी कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय थे, जबकि कुछ अन्य राज्य के अलग-अलग हिस्सों में संगठन के लिए काम कर रहे थे. बताया जा रहा है कि इन सभी ने सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष सरेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली है. पुलिस मुख्यालय में प्रस्तावित कार्यक्रम के बाद इनके बारे में विस्तृत जानकारी साझा की जा सकती है.
लगातार अभियान से बढ़ा माओवादी संगठन पर दबाव
झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पिछले कई महीनों से संयुक्त रूप से जंगल और पहाड़ी इलाकों में विशेष अभियान चला रहे हैं. इन अभियानों के दौरान कई ठिकानों को ध्वस्त किया गया है और संगठन के कई सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार भी किया गया है. लगातार बढ़ते दबाव के कारण कई उग्रवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का विकल्प चुन रहे हैं.
बड़े नेताओं पर भी जारी है कार्रवाई
हाल के दिनों में सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के करीबी सहयोगी अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरिडीह-बोकारो सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया था. इस गिरफ्तारी को संगठन के लिए बड़ा झटका माना गया. हालांकि, मिसिर बेसरा अब भी सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश में अभियान लगातार जारी है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राज्य में करीब 30 इनामी नक्सली अभी भी सक्रिय बताए जाते हैं.
'ऑपरेशन नवजीवन' से बढ़ रहा आत्मसमर्पण का आंकड़ा
झारखंड पुलिस द्वारा संचालित पुनर्वास पहल 'ऑपरेशन नवजीवन' का प्रभाव लगातार दिखाई दे रहा है. इस योजना के तहत हथियार छोड़ने वाले उग्रवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इससे पहले 21 मई को भाकपा (माओवादी) के 25 और जेजेएमपी के दो उग्रवादियों सहित कुल 27 लोगों ने आत्मसमर्पण किया था. उस दौरान सुरक्षा एजेंसियों को 16 आधुनिक हथियार और 2,857 कारतूस भी सौंपे गए थे.
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल 18 से अधिक उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की जानकारी सूत्रों के आधार पर सामने आई है और पुलिस की ओर से इसकी औपचारिक पुष्टि होना बाकी है. यदि प्रस्तावित कार्यक्रम में इसकी घोषणा होती है, तो यह झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी. लगातार हो रहे सरेंडर, गिरफ्तारियों और पुनर्वास कार्यक्रमों से यह संकेत मिल रहा है कि राज्य में माओवादी नेटवर्क पहले की तुलना में कमजोर पड़ रहा है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां शेष सक्रिय उग्रवादियों के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं.

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