संसद के मकर द्वार पर ‘अमित शाह लापता’! पोस्टर लेकर पहुंचा विपक्ष, मचा हंगामा… सदन में क्यों नहीं दिखे गृह मंत्री?
JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है. AISA अध्यक्ष नेहा बोरा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचीं और छात्रों से मुलाकात की. वह आंदोलनकारियों के साथ विधानसभा मार्च में भी शामिल होंगी.

New Delhi: संसद के मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया, जब विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन किया. हाथों में पोस्टर था- ‘अमित शाह लापता’. नारेबाजी के बीच विपक्ष ने सवाल उठाया कि जिन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जा रहा है, उन पर गृह मंत्री सदन में सामने आकर अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहे हैं. प्रदर्शन के केंद्र में 20 जुलाई के CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मुद्दा रहा. कांग्रेस सांसदों ने दोनों मामलों पर संसद में चर्चा और अमित शाह के बयान की मांग की.
‘अमित शाह लापता’ पोस्टर ने खींचा ध्यान, मकर द्वार पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन शुरू हुआ तो सबसे ज्यादा चर्चा ‘अमित शाह लापता’ लिखे पोस्टरों की रही. विपक्ष का आरोप है कि गृह मंत्री से जुड़े गंभीर सवाल संसद के भीतर उठ रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से वह जवाब सामने नहीं आ रहा जिसका विपक्ष इंतजार कर रहा है. कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि देश के गृह मंत्री का संसद में मौजूद रहना और विपक्ष के सवालों का जवाब देना जरूरी है. उन्होंने मांग की कि अमित शाह सदन में आकर पूरे मामले पर बयान दें. विपक्षी सांसदों की रणनीति साफ दिखी- एक तरफ मकर द्वार पर प्रदर्शन, दूसरी तरफ सदन के भीतर मुद्दे उठाकर सरकार पर दबाव. इससे शुक्रवार की शुरुआत ही टकराव के माहौल में हुई.
कार्यवाही शुरू होते ही 12 बजे तक स्थगित
मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन का असर लोकसभा के भीतर भी दिखाई दिया. राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर 20 जुलाई को हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की. हंगामा इतना बढ़ा कि लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी. यानी जिस दिन विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में था, उस दिन सदन की शुरुआत ही शोर-शराबे और स्थगन के साथ हुई. पिछले दिनों भी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में लगातार हंगामा हुआ है. 29 जुलाई को भी गृह मंत्री के बयान की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई थी.
CJP प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई, ‘किसने दिया आदेश?’
विपक्ष का अमित शाह पर हमला अचानक नहीं हुआ है. 20 जुलाई को संसद मार्च की कोशिश के दौरान CJP प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था. अलग-अलग रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई, आंसू गैस, लाठीचार्ज और पैलेट के इस्तेमाल का जिक्र आया. बाद में इस कार्रवाई को लेकर संसद में गृह मंत्री से जवाब मांगने का सिलसिला शुरू हुआ. 27 जुलाई को भी विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार के पास प्रदर्शन करते हुए गृह मंत्री से जवाब और माफी की मांग की थी. उस दौरान पोस्टर पर ‘वोट चोरी, पेपर चोरी, चंदा चोरी’ जैसे नारे भी नजर आए थे. अब शुक्रवार को यही मुद्दा एक और ज्यादा आक्रामक राजनीतिक संदेश के साथ सामने आया- ‘अमित शाह लापता’.
राम मंदिर के चढ़ावे का मुद्दा भी विपक्ष ने जोड़ा
शुक्रवार को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी पर तत्काल चर्चा की मांग की. विपक्ष का आरोप है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दान और कीमती सामान को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. यह मुद्दा पिछले दिनों से विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बना हुआ है. समाजवादी पार्टी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर प्रदर्शन किया था. विपक्ष इसे केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा सवाल बता रहा है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी कानूनी स्थिति अलग विषय है. संसद में विपक्ष इन्हें सरकार को घेरने के लिए राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा रहा है.
‘गृह मंत्री सदन में आएं और जवाब दें’, विपक्ष ने बढ़ाया दबाव
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने सीधे अमित शाह की संसद में मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर बयान देना चाहिए. विपक्ष की मांग है कि 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी तय हो, प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार अपना पक्ष रखे और राम मंदिर के दान से जुड़े आरोपों पर भी संसद में चर्चा हो. यानी शुक्रवार को विपक्ष ने दो अलग-अलग मुद्दों को एक राजनीतिक फ्रेम में जोड़ दिया- एक तरफ छात्रों पर कार्रवाई और दूसरी तरफ राम मंदिर के चढ़ावे का मामला. दोनों मामलों में विपक्ष का निशाना सीधे गृह मंत्रालय और अमित शाह पर है.
मानसून सत्र के आखिरी दिन फिर टकराव, अब आगे क्या?
मानसून सत्र के तीसरे सप्ताह के आखिरी दिन की शुरुआत जिस तरह हुई, उससे साफ है कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध अभी खत्म नहीं हुआ है. पिछले कई दिनों से सदन में विपक्ष की ओर से लगातार प्रदर्शन और स्थगन प्रस्ताव दिए जा रहे हैं, जबकि सरकार की तरफ से विधायी कामकाज आगे बढ़ाने पर जोर है. इस पूरे घटनाक्रम में शुक्रवार का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश मकर द्वार से आया, जहां ‘अमित शाह लापता’ वाला पोस्टर विपक्ष के प्रदर्शन का चेहरा बन गया. सवाल अब सिर्फ इतना नहीं रह गया है कि गृह मंत्री सदन में हैं या नहीं, बल्कि विपक्ष इसे जवाबदेही के सवाल से जोड़ रहा है. राम मंदिर के चढ़ावे की कथित हेराफेरी और 20 जुलाई के CJP प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई- दोनों मुद्दों पर विपक्ष अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है. ऐसे में मानसून सत्र के अगले कार्यदिवसों में भी यह टकराव जारी रहने के आसार हैं.

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