पुरुलिया के कुड़मी महाकुंभ में उमड़ा जनसैलाब, कोड़ाडी मैदान की ओर जाने वाली सड़कों पर लंबी कतारें
“पुरुलिया के कड़ाडी मैदान में कुड़मी समाज के बड़े महाजुटान में लाखों लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है. 40 हजार करम दलों की भागीदारी और कुड़मी समाज की ST दर्जे की मांग के बीच शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया है.”

Purulia: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में रविवार को कुड़मी समाज के बड़े जुटान ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है. टामना थाना क्षेत्र के कोड़ाडी मैदान में आयोजित ‘करम परबतिया महा जुड़ुआहि’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. आयोजन स्थल की ओर जाने वाली सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कई मार्गों पर कई किलोमीटर तक यातायात प्रभावित हुआ है. बस, बाइक, टेंपो, टोटो और दूसरे साधनों से लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. आयोजकों ने इस आयोजन में लाखों लोगों के जुटने का दावा किया है. भीड़ और आयोजन के आकार के बीच अब सबसे ज्यादा नजर उस मंच पर है, जहां कुड़मी समाज की लंबे समय से चली आ रही अनुसूचित जनजाति यानी ST दर्जे की मांग और उससे जुड़े मुद्दों पर क्या बात सामने आती है.
कोड़ाडी की ओर उमड़ा हुजूम
20 सितंबर को होने वाले इस बड़े आयोजन को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं. रविवार को कार्यक्रम शुरू होने के साथ ही पुरुलिया के अलग-अलग हिस्सों से लोगों का कोड़ाडी मैदान की ओर पहुंचना तेज हो गया. मैदान को जोड़ने वाली कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं. कुछ मार्गों पर कई किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है. कार्यक्रम में पहुंचने वाले लोगों में बड़ी संख्या आसपास के इलाकों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से आने वालों की भी है. लोग बस, बाइक, टेंपो, टोटो और निजी वाहनों के जरिए कार्यक्रम स्थल तक पहुंच रहे हैं. भीड़ इतनी बढ़ी कि कई लोगों को वाहनों से आगे का रास्ता तय करने के बजाय पैदल ही मैदान की ओर बढ़ना पड़ा. आयोजकों की ओर से इस जुटान में लाखों लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है. शनिवार को हुए पूर्वाभ्यास कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई थी.
करम नृत्य से सामाजिक जुटान तक
‘करम परबतिया महा जुड़ुआहि’ को कुड़मी समाज के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर अहम आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है. कार्यक्रम में करम नृत्य की कई टीमें शामिल होने वाली हैं. कुड़मी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को इस आयोजन में प्रमुखता दी जा रही है. हालांकि, इस महाजुटान की चर्चा केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है. इसके पीछे कुड़मी समाज से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और संवैधानिक मुद्दे भी हैं. कुड़मी समाज लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी ST सूची में शामिल किए जाने की मांग करता रहा है. इसके अलावा कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने समेत अन्य मांगें भी समय-समय पर उठती रही हैं. इसी वजह से कोड़ाडी मैदान में होने वाले कार्यक्रम को लेकर सामाजिक संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है.
ST दर्जे पर क्या निकलेगा रास्ता?
कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रहे लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा कुड़मी समाज की ST दर्जे की मांग को लेकर है. सवाल यह है कि क्या इस बड़े मंच से इस मुद्दे को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा या नया राजनीतिक संकेत सामने आएगा. फिलहाल किसी नए सरकारी फैसले या आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में कार्यक्रम के मंच से होने वाले संबोधन को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ी हुई है. कुड़मी समाज की ओर से लंबे समय से यह मांग रखी जाती रही है कि समुदाय को ऐतिहासिक और सामाजिक आधार पर ST सूची में शामिल किया जाए. आंदोलन से जुड़े संगठनों का तर्क है कि कुड़मी समाज की पहचान और इतिहास को देखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. दूसरी तरफ, कुछ आदिवासी संगठनों ने कुड़मी समुदाय को ST सूची में शामिल करने की मांग का विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे मौजूदा आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और हितों पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि ST दर्जे का मुद्दा पुरुलिया और आसपास के इलाकों में सामाजिक बहस के साथ राजनीतिक मुद्दा भी बना हुआ है.
अब मंच से क्या संदेश आएगा?
कुड़मी महाकुंभ में जिस तरह की भीड़ पहुंच रही है, उसने इस आयोजन का दायरा साफ तौर पर बड़ा कर दिया है. कोड़ाडी मैदान की ओर जाने वाली सड़कों पर लंबी कतारें और जगह-जगह ट्रैफिक का दबाव इस जुटान की तस्वीर सामने रख रहा है. कार्यक्रम को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा थी. अब निगाहें मंच से होने वाले संबोधनों पर टिक गई हैं. खासतौर पर ST दर्जे की मांग, कुड़माली भाषा और कुड़मी समाज से जुड़े दूसरे मुद्दों पर क्या संदेश दिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा. फिलहाल कोड़ाडी मैदान की ओर लोगों का पहुंचना जारी है. बड़ी संख्या में जुट रही भीड़ के बीच अब सबकी नजर कार्यक्रम के अगले चरण और मंच से सामने आने वाले संदेश पर है.


