NEET-UG 2026 पेपर लीक में बड़ा खुलासा, 45 आरोपी हिरासत में; नासिक से पटना तक फैला नेटवर्क
“NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. राजस्थान SOG और CBI की जांच में नासिक से हरियाणा तक फैले नेटवर्क के संकेत मिले हैं. जयपुर से मनीष यादव और अविनाश लांबा की गिरफ्तारी के बाद अब तक 45 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.”

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 अब देशव्यापी पेपर लीक घोटाले में बदल चुकी है. परीक्षा रद्द होने के बाद राजस्थान SOG, CBI और कई राज्यों की पुलिस ने जांच तेज कर दी है. अब तक 45 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि जयपुर से मनीष यादव और अविनाश लांबा की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और बड़ा बना दिया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क महाराष्ट्र के नासिक, राजस्थान, हरियाणा, बिहार और उत्तराखंड तक फैला हुआ था. शुरुआती जांच में सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए प्रश्नपत्र फैलाने के संकेत मिले हैं. वहीं पटना स्कूल कनेक्शन और 150 पन्नों के ‘गेस पेपर’ में 120 सवाल मैच होने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया है. अब इस मामले की जांच CBI कर रही है और कई राज्यों में लगातार छापेमारी जारी है.
नासिक से राजस्थान तक फैला NEET पेपर लीक नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक NEET-UG 2026 पेपर लीक का नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था. महाराष्ट्र के नासिक में सबसे पहले लीक प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी शेयर किए जाने का शक है. इसके बाद राजस्थान और हरियाणा के जरिए इसे अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाया गया. सूत्रों के अनुसार, कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले “गेस पेपर” के नाम पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था. राजस्थान SOG को जांच के दौरान 150 पन्नों का एक गेस पेपर मिला, जिसमें करीब 120 सवाल असली NEET परीक्षा से हूबहू मेल खाते पाए गए. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सामग्री परीक्षा से कई दिन पहले ही अलग-अलग टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप में फैल चुकी थी. अब कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और डिजिटल चैट की फॉरेंसिक जांच की जा रही है.
मनीष यादव और अविनाश लांबा गिरफ्तार, संजीव मुखिया की तलाश
जयपुर में राजस्थान SOG ने मनीष यादव और अविनाश लांबा को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों का दावा है कि मनीष यादव इस पूरे नेटवर्क का अहम चेहरा था और उसने कथित तौर पर पेपर सप्लाई चैन को मैनेज किया. उससे लगातार पूछताछ की जा रही है और उसके संपर्क में रहे कई लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं CBI जांच में संजीव मुखिया का नाम भी सामने आया है, जिसे मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि वह अभी फरार है और एजेंसियां उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मनीष यादव गैंग और संजीव मुखिया नेटवर्क के बीच क्या संबंध थे.
पटना स्कूल कनेक्शन ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चिंता
पेपर लीक मामले में बिहार कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. CBI ने पटना से मनीष प्रकाश और आशुतोष नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन्होंने परीक्षा से पहले पटना के एक निजी स्कूल में 20 से 25 छात्रों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र याद करवाया था. बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई को जांच के दौरान आधे जले हुए प्रश्नपत्र भी मिले हैं. शुरुआती जांच में हजारीबाग के एक परीक्षा केंद्र से पेपर लीक होने की आशंका जताई गई है. एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या अलग-अलग राज्यों में सक्रिय गैंग आपस में जुड़े हुए थे.
NTA पर सवाल, छात्रों में गुस्सा और CBI जांच तेज
पेपर लीक विवाद के बाद NTA की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. परीक्षा से पहले एजेंसी ने सभी आरोपों को अफवाह बताया था, लेकिन बड़ी संख्या में सवाल मैच होने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी. सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी है और जल्द री-NEET कराने की बात कही गई है. देशभर में लाखों छात्र और अभिभावक नाराज हैं. सोशल मीडिया पर लगातार परीक्षा प्रणाली और NTA की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. कई छात्र संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग की है. अब पूरे देश की नजर CBI जांच पर टिकी है कि आखिर इस पेपर लीक रैकेट में कितने लोग शामिल थे और यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर काम कर रहा था.



