लापता युवती कंकाल केस: हाईकोर्ट ने पूछा, आखिर कहां होगा DNA सैंपल कलेक्शन
बोकारो की लापता युवती के कथित कंकाल मामले में जांच एक बार फिर उलझ गई है. DNA सैंपल कलेक्शन को लेकर स्पष्टता नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.


Ranchi: बोकारो की लापता युवती के कथित कंकाल की पहचान को लेकर चल रही जांच में एक नया मोड़ सामने आया है. डीएनए जांच के लिए युवती के माता-पिता का सैंपल लेने को लेकर स्पष्टता नहीं बन पा रही है, क्योंकि नामकुम स्थित आर्मी हॉस्पिटल में सैंपल कलेक्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं है. केंद्र सरकार की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका में यह जानकारी दी गई, जिसके बाद हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर विशेष सुनवाई हुई. अदालत ने अब केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन अस्पतालों में सैंपल लिया जा सकता है. इस मामले ने जांच प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है और अब अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्णय की उम्मीद है.
आर्मी हॉस्पिटल नामकुम में नहीं है जरूरी सुविधा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि नामकुम स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में डीएनए सैंपल कलेक्शन के लिए आवश्यक उपकरण और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं. ऐसी स्थिति में अस्पताल सीधे सैंपल लेने में सक्षम नहीं है. जरूरत पड़ने पर स्थानीय थाना के माध्यम से अन्य सरकारी अस्पतालों में सैंपल कलेक्शन की व्यवस्था कराई जाती है. इस जानकारी के सामने आने के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वैकल्पिक व्यवस्था पर जवाब मांगा है.
चार अस्पतालों के नाम सुझाए, कोर्ट ने मांगी स्पष्टता
केंद्र की ओर से डीएनए सैंपल कलेक्शन के लिए चार संस्थानों का सुझाव दिया गया है, जिनमें रामगढ़ का सिख मिलिट्री क्षेत्र अस्पताल, रांची का सीसीएल अस्पताल, देवघर स्थित एम्स और कोलकाता का एक सरकारी अस्पताल शामिल है. अदालत ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में यह स्पष्ट किया जाए कि इन संस्थानों में से किस स्थान पर सैंपल लिया जाएगा. इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि जांच प्रक्रिया में देरी न हो.
कंकाल की पहचान पर बना संशय, अगली सुनवाई अहम
मामले में पहले ही अदालत कंकाल के डीएनए परीक्षण को कोलकाता की फॉरेंसिक लैब में कराने का निर्देश दे चुकी है, जबकि पोस्टमार्टम रिम्स में कराने की बात कही गई थी. अब माता-पिता के सैंपल के बिना जांच पूरी नहीं हो सकती. याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि बरामद कंकाल युवती का नहीं है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है. युवती पिछले साल जुलाई से लापता है और इस मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच जारी है. ऐसे में अगली सुनवाई इस केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

Jharkhand Politics: महिला आरक्षण पर तेज बयानबाजी, नीरा यादव ने विपक्ष पर साधा निशाना

शराब घोटाले की धीमी जांच पर मरांडी का हमला, पूछा— प्रक्रिया या प्रोटेक्शन?






Leave a comment