JSSC-CGL पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, पश्चिम बंगाल के 3 ठिकानों पर अभ्यर्थियों को उत्तर याद कराने का आरोप
JSSC CGL परीक्षा 2023 के कथित पेपर लीक मामले में CID जांच के दौरान पश्चिम बंगाल के तीन ठिकानों का नाम सामने आया है. जांच में दिलीप पासवान के बैंक खाते में करीब 12 लाख रुपये के लेन-देन और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा 2023 में कथित पेपर लीक का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम को पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं. जांच में पश्चिम बंगाल के कुछ ठिकानों का जिक्र सामने आया है, जहां अभ्यर्थियों को परीक्षा से संबंधित प्रश्न और उनके संभावित उत्तर याद कराने का आरोप है. इनमें नियामतपुर का मातुभवन, कोलकाता का होटल एन-7 और दुर्गापुर के सितुलपुर का नाम शामिल है. जांच एजेंसी अब आरोपियों के बयानों, तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों में हुए लेन-देन के आधार पर कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.
पश्चिम बंगाल के तीन ठिकाने जांच के दायरे में
CID की जांच में नियामतपुर स्थित मातुभवन, कोलकाता के होटल एन-7 और दुर्गापुर के सितुलपुर का उल्लेख सामने आया है. आरोप है कि इन स्थानों पर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से जुड़े प्रश्नों और उत्तरों की तैयारी कराई गई थी. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन जगहों पर कौन-कौन मौजूद था और कथित गतिविधियों का परीक्षा से क्या संबंध था.
दिलीप पासवान के खाते में 12 लाख रुपये आने की जानकारी
रिमांड पर लिए गए आरोपी दिलीप कुमार पासवान से पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को कई जानकारियां मिलीं. जांच के मुताबिक, अलग-अलग अभ्यर्थियों के माध्यम से उनके बैंक खाते में करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. CID ने संबंधित अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए हैं. अब इन पैसों के लेन-देन का उद्देश्य और कथित मामले से उनका संबंध जांचा जा रहा है.
कॉल डिटेल और लोकेशन से जुटाए जा रहे साक्ष्य
जांच एजेंसी संबंधित दिनों की कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है. इन साक्ष्यों के जरिए आरोपियों और अभ्यर्थियों के बीच संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है. अधिकारियों की जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर अभ्यर्थियों को ले जाने की व्यवस्था किसने की थी.
मनु कुमार सिंह और राजन कुमार सिंह से पूछताछ
मामले में मनु कुमार सिंह और राजन कुमार सिंह से भी पूछताछ की गई थी. दोनों को तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया था. जांच के अनुसार, दोनों की भूमिका परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ICN के संचालक मिथिलेश सिंह के कथित एजेंट के रूप में संदिग्ध बताई गई है. अभ्यर्थियों को पटना और अन्य स्थानों पर ले जाने तथा प्रश्न-उत्तर याद कराने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है. मनु कुमार सिंह को छपरा और राजन कुमार सिंह को पटना से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी.
अब कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही CID
CID अब बैंक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और पूछताछ में मिले बयानों को मिलाकर पूरे मामले की जांच कर रही है. जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क के संचालन, अभ्यर्थियों से संपर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाना है. फिलहाल, जांच में सामने आए तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. आरोपियों की जिम्मेदारी तय होना जांच के नतीजों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

