JPSC जांच में बड़ा खुलासा: 10 रुपये के नोट को कोड बनाने का आरोप, पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते पर CID की चार्जशीट में गंभीर दावे
JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID की चार्जशीट में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते समेत कई लोगों से जुड़े कथित लेन-देन और संपर्कों का उल्लेख किया गया है. जांच में 10 रुपये के नोट को कोड के रूप में इस्तेमाल करने, कथित कमीशन और मिजोरम में भुगतान के आरोपों की जानकारी सामने आई है. मामले में जांच जारी है.

रांची:- झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीआईडी की जांच में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं. जांच एजेंसी की चार्जशीट में आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते, कुछ निजी व्यक्तियों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के बीच कथित संपर्कों तथा वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया गया है. आरोपों के मुताबिक, कथित अवैध भुगतान के लिए 10 रुपये के नोट को पहचान के संकेत के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. चार्जशीट में बिनसिस एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार और ख्यांग्ते के बीच संपर्क स्थापित कराने में धर्मेंद्र की भूमिका का भी जिक्र है. जांच में एजेंसी को परीक्षा आयोजन का काम सौंपे जाने और इसके बदले कथित कमीशन तय होने की बात कही गई है. इसके अलावा, मिजोरम में कथित नकद भुगतान, संदिग्ध संपर्कों और सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेज मिलने जैसे पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है. इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.
10 रुपये के नोट को कोड की तरह इस्तेमाल करने का आरोप
सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार, कथित अवैध लेन-देन में 10 रुपये के नोट को कोड के रूप में इस्तेमाल किए जाने का आरोप है. जांच में इस कथित तरीके और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्कों की पड़ताल की गई है. हालांकि, इस दावे को लेकर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
परीक्षा एजेंसी को काम दिलाने के बदले कमीशन का दावा
जांच एजेंसी ने बिनसिस एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार और तत्कालीन आयोग अध्यक्ष एल ख्यांग्ते के बीच संपर्क स्थापित कराने में धर्मेंद्र की भूमिका का उल्लेख किया है. चार्जशीट में दावा किया गया है कि इसके बाद एजेंसी को JET परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी मिली. इसके बदले दो करोड़ रुपये नकद और बिल की राशि का 10 प्रतिशत कमीशन तय होने का आरोप है.
मिजोरम में कथित भुगतान की जांच
चार्जशीट के मुताबिक, 25 दिसंबर 2025 को अरुण कुमार और सानंद प्रकाश मिजोरम गए थे. जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान ख्यांग्ते को 2.5 लाख रुपये दिए गए. इस यात्रा के संबंध में एयरलाइन रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन का विश्लेषण किए जाने की बात कही गई है. कथित भुगतान से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक जांच के आधार पर होगी.
कॉल रिकॉर्ड में कई लोगों से संपर्क का उल्लेख
सीआईडी की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण का भी जिक्र है. चार्जशीट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में अरुण कुमार और ब्रज राम के बीच 408 बार बातचीत हुई. वहीं, पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पांच बार और धर्मेंद्र से एक बार संपर्क होने की जानकारी दी गई है. इन संपर्कों का वास्तविक संदर्भ और मामले में उनकी प्रासंगिकता जांच का विषय है.
लैपटॉप बैग से दस्तावेज मिलने का दावा, जांच जारी
चार्जशीट में आरोप है कि वर्ष 2024 में ब्लैकलिस्टेड टीडीपीएल एजेंसी को वर्ष 2025 की परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी बिना टेंडर प्रक्रिया के दी गई थी. जांच के दौरान ख्यांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 सफल अभ्यर्थियों के गोपनीय दस्तावेज और मोबाइल नंबर मिलने का भी दावा किया गया है. फिलहाल सीआईडी कथित अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और बैंक स्टेटमेंट की जांच कर रही है. मामले में आरोपों की अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध प्रमाणों से स्पष्ट होगी.

