JTET भाषा विवाद: कमेटी में जुड़े दो और मंत्री, 3 जून को होगी अहम बैठक; अब 7 सदस्यीय समिति करेगी अंतिम फैसला
झारखंड में JTET भाषा विवाद पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. विवाद सुलझाने के लिए बनाई गई मंत्रियों की कमेटी का दायरा बढ़ा दिया गया है. अब इस समिति में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को भी शामिल कर लिया गया है.

Ranchi: झारखंड में JTET भाषा विवाद पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. विवाद सुलझाने के लिए बनाई गई मंत्रियों की कमेटी का दायरा बढ़ा दिया गया है. अब इस समिति में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और हफीजुल हसन को भी शामिल कर लिया गया है. पहले यह कमेटी 5 सदस्यीय थी, लेकिन अब 7 सदस्यीय हो गई है. सरकार ने 3 जून को समिति की अहम बैठक भी बुलाई है, जिसमें JTET नियमावली 2026 से भोजपुरी, मगही और अंगिका को बाहर किए जाने के मुद्दे पर अंतिम चर्चा होने की संभावना है. माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद समिति अपनी सिफारिश सरकार को सौंप सकती है. ऐसे में अब सभी की नजर 3 जून की बैठक और उसके बाद होने वाले फैसले पर टिकी हुई है.
भोजपुरी-मगही-अंगिका को लेकर शुरू हुआ था विवाद
JTET नियमावली 2026 में भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा सूची से बाहर किए जाने के बाद राज्यभर में विरोध शुरू हो गया था. अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों ने इसे रोजगार के अवसरों पर असर डालने वाला फैसला बताया था. बढ़ते विवाद के बाद सरकार ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी बनाई थी, जिसका काम पूरे मामले की समीक्षा कर सुझाव देना था. अब दो और मंत्रियों को जोड़कर समिति का विस्तार किया गया है.
कमेटी के भीतर भी अलग-अलग राय की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक समिति की पिछली बैठकों में भोजपुरी, मगही और अंगिका को लेकर अलग-अलग राय सामने आई थी. कुछ मंत्री इन भाषाओं को सूची में शामिल करने के पक्ष में बताए गए, जबकि कुछ ने स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय पहचान का हवाला देते हुए आपत्ति जताई. अधिकारियों की रिपोर्ट में भी इन भाषाओं को शामिल करने की पैरवी किए जाने की चर्चा है. बताया जा रहा है कि इन भाषाओं को बाहर रखने से हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो सकते हैं. अब 3 जून की बैठक को निर्णायक माना जा रहा है. बैठक के बाद समिति की अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जा सकती है. इसके बाद ही साफ होगा कि JTET में भोजपुरी, मगही और अंगिका को दोबारा जगह मिलेगी या नहीं. फिलहाल भाषा विवाद पर अंतिम फैसले का इंतजार जारी है.

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