Jharkhand News: 5 लाख का इनामी नक्सली सागेन अंगरिया कर सकता है सरेंडर
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल से नक्सल गतिविधियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक, 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली सागेन अंगरिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है.

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल से नक्सल गतिविधियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक, 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली सागेन अंगरिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर सकता है. हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि वह लगातार पुलिस के संपर्क में है. हाल ही में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद इलाके में दबाव काफी बढ़ गया है. बताया जा रहा है कि इसी दबाव और घायल होने की वजह से अंगरिया ने सरेंडर का मन बनाया है. अगर ऐसा होता है तो यह झारखंड पुलिस के लिए नक्सल विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जाएगी.
सारंडा मुठभेड़ में घायल हुआ था सागेन अंगरिया
सूत्रों के अनुसार, 29 अप्रैल को सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान कई घंटों तक गोलीबारी चली. इसी मुठभेड़ में नक्सली संगठन से जुड़े इसराइल पूर्ति उर्फ अमृत की मौत हो गई थी. बताया जा रहा है कि सागेन अंगरिया भी इस मुठभेड़ में घायल हो गया था. जंगल में लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन और सुरक्षाबलों की घेराबंदी के कारण वह इलाज कराने में भी सफल नहीं हो पा रहा था.
पुलिस के संपर्क में आने की चर्चा तेज
घायल होने और लगातार बढ़ते दबाव के बीच सागेन अंगरिया के पुलिस के संपर्क में आने की खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि उसने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई है. सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं. हालांकि पुलिस अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर आधिकारिक जानकारी सामने आ सकती है. इलाके में सुरक्षा बल लगातार निगरानी बनाए हुए हैं.
परिवार भी चाहता है कि वह मुख्यधारा में लौटे
सागेन अंगरिया चाईबासा जिले के सांगाजाटा गांव का रहने वाला बताया जाता है. मुठभेड़ में मारा गया इसराइल पूर्ति भी उसी गांव का निवासी था. स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, अंगरिया के परिवार के लोग भी चाहते हैं कि वह हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन में लौट आए. झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा अपनाई है, जिसके बाद सरकार की पुनर्वास नीति को भी मजबूती मिली है.

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