JTET भाषा विवाद पर सरकार सख्त: वित्त मंत्री की अध्यक्षता में बनी उच्चस्तरीय समिति
“झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) नियमावली में भोजपुरी, मगही, अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने पर विवाद गहरा गया है. बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है.”

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) नियमावली को लेकर शुरू हुआ भाषा विवाद अब राज्य सरकार के लिए बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. भोजपुरी, मगही, अंगिका, मैथिली, कुड़ुख और मुंडारी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को नियमावली में शामिल नहीं किए जाने पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर लगातार विरोध हो रहा था. बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले के समाधान के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. इस समिति की अध्यक्षता वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर करेंगे. सरकार का उद्देश्य विभिन्न जिलों और समुदायों की भाषाई पहचान को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लेना है. विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ मंत्रियों ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे. अब समिति सभी पहलुओं की समीक्षा कर सरकार को अपनी सिफारिश देगी, जिसके बाद नई नियमावली को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है.
पांच सदस्यीय समिति का गठन
भाषा विवाद को शांत करने और सभी पक्षों की राय शामिल करने के लिए सरकार ने पांच सदस्यीय समिति बनाई है. इस समिति की कमान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को सौंपी गई है. इसके अलावा श्रम मंत्री संजय प्रसाद, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार को सदस्य बनाया गया है. समिति का मुख्य काम JTET नियमावली में भाषाओं को लेकर उठे विवाद की समीक्षा करना और समाधान सुझाना होगा.
क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उठा विवाद
JTET नियमावली के प्रारूप में कई क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया था. इसे लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध शुरू हो गया. खासकर भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली भाषी समुदायों ने इसे अपनी भाषाई पहचान की अनदेखी बताया. वहीं आदिवासी समाज की ओर से कुड़ुख और मुंडारी जैसी भाषाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए. सरकार के कुछ मंत्रियों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी.
कैबिनेट ने रोकी मंजूरी, अब नई नियमावली की तैयारी
विवाद बढ़ने के बाद राज्य कैबिनेट ने JTET नियमावली को तत्काल मंजूरी नहीं दी. सरकार ने फैसला लिया कि पहले झारखंड के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली भाषाओं की समीक्षा की जाएगी, उसके बाद नई नियमावली तैयार होगी. इस बीच भाजपा समेत विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा. कई नेताओं ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है.

