झारखंड में PESA नियमावली लागू, ग्राम सभाओं को मिले व्यापक अधिकार
झारखंड सरकार ने राज्य में पेसा कानून की नियमावली को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है. पंचायती राज विभाग ने 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली 2025 से संबंधित अधिसूचना जारी की, जिसके साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जल, जंगल और जमीन से जुड़े कई अहम अधिकार मिल गए हैं.

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य में पेसा कानून (Panchayat Extension to Scheduled Areas Act, 1996) की नियमावली को औपचारिक रूप से लागू कर दिया है. पंचायती राज विभाग ने 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली 2025 से संबंधित अधिसूचना जारी की, जिसके साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जल, जंगल और जमीन से जुड़े कई अहम अधिकार मिल गए हैं. सरकार का दावा है कि इससे आदिवासी स्वशासन, पारंपरिक नेतृत्व और ग्राम समुदायों की भागीदारी और मजबूत होगी.
हर माह होगी ग्राम सभा की बैठक
नई नियमावली के तहत प्रत्येक ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से होगी. बैठक सार्वजनिक होगी और निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएंगे. ग्राम सभा को कल्याण, संसाधन प्रबंधन और विकास कार्यों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है.
17 अध्यायों में बंटी है नियमावली
अधिसूचित पेसा नियमावली 2025 को कुल 17 अध्यायों में विभाजित किया गया है.
- पहला अध्याय: नियमावली में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषा
- दूसरा अध्याय: पारंपरिक ग्राम सभा और उनकी सीमाओं के प्रकाशन की प्रक्रिया
- तीसरा अध्याय: ग्राम सभा की बैठक, कोरम और निर्णय प्रक्रिया
- चौथा अध्याय: ग्राम सभा अध्यक्ष और सहायक सचिव के कर्तव्य
चौथे अध्याय में यह भी प्रावधान किया गया है कि मांझी, मुंडा, पाहन जैसे पारंपरिक पदाधिकारियों को ग्राम सभा का अध्यक्ष चुना या मनोनीत किया जा सकता है.
ग्राम सभा को मिले न्याय और निगरानी के अधिकार
नियमावली के तहत ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में विवादों के निपटारे, परंपराओं के संरक्षण और सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है. यदि कोई नियम ग्राम सभा की परंपराओं के अनुरूप नहीं है, तो ग्राम सभा प्रस्ताव पारित कर उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार तक भेज सकेगी. सरकार 30 दिनों में उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी, जो 90 दिनों में अपनी राय देगी.
इसके अलावा, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी होने पर पुलिस को सात दिनों के भीतर ग्राम सभा को सूचना देना अनिवार्य होगा.
विकास, भूमि और संसाधनों पर ग्राम सभा की पकड़
- विकास योजनाओं की मंजूरी, लाभुकों की पहचान और सामाजिक संस्थाओं पर नियंत्रण ग्राम सभा के पास होगा.
- भू-अर्जन के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य कर दी गई है.
- लघु जल निकायों, लघु खनिजों और मादक द्रव्यों के नियंत्रण का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है.
लघु वन उपज और बाजार प्रबंधन
नियमावली में लघु वन उपज के स्वामित्व, उपयोग और विपणन का अधिकार ग्राम सभा को सौंपा गया है. साथ ही अवैध रूप से हस्तांतरित जमीन की वापसी, बाजार प्रबंधन और अपराध नियंत्रण से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं.
आदिवासी स्वशासन को मिलेगा बल
पेसा नियमावली लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार के 15वें वित्त आयोग की अनुशंसित राशि अब सामान्य प्रक्रिया के तहत सीधे अनुसूचित क्षेत्रों को मिल सकेगी. सरकार का कहना है कि इस कानून से आदिवासी क्षेत्रों में निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति ग्राम सभाओं के हाथों में आएगी और जल–जंगल–जमीन पर आदिवासियों का अधिकार और अधिक मजबूत होगा.

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