झारखंड एयर एंबुलेंस क्रैश: जांच में बड़ा खुलासा, कई सवाल अब भी बरकरार
झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश की AAIB रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था और ELT भी काम नहीं कर रहा था, जिससे जांच और जटिल हो गई है.


Chatra: जिले में 23 फरवरी 2026 को हुए एयर एंबुलेंस हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस दर्दनाक दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक मरीज, उसके परिजन और क्रू मेंबर शामिल थे. अब इस हादसे को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, विमान में ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था, जिससे हादसे के अंतिम पलों की सटीक जानकारी मिल पाना मुश्किल हो गया है. इसके अलावा, इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) के काम नहीं करने के कारण मलबे तक पहुंचने में भी देरी हुई. हालांकि जांच में कई तकनीकी पहलुओं पर फोकस किया जा रहा है, लेकिन हादसे की असली वजह अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.
कब और कैसे हुआ हादसा
यह हादसा 23 फरवरी 2026 को हुआ, जब रेडबर्ड कंपनी का बीचक्राफ्ट C90 एयर एंबुलेंस विमान रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था. उड़ान भरने के करीब 23 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से टूट गया. आखिरी बार पायलट ने कोलकाता एटीसी से फ्लाइट लेवल 140 पर जाने की अनुमति मांगी थी. इसके बाद विमान रडार से गायब हो गया. कुछ समय बाद चतरा जिले में इसके क्रैश होने की पुष्टि हुई. हादसा इतना भयावह था कि विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर ही सभी सात लोगों की मौत हो गई.
जांच में सामने आए बड़े खुलासे
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था. न ही कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) और न ही फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) मौजूद थे. नियमों के तहत इस विमान को इन उपकरणों से छूट मिली हुई थी, लेकिन इससे जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. इसके अलावा, विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) भी दुर्घटना के समय सक्रिय नहीं हुआ, जिससे मलबे को ढूंढने में देरी हुई. प्रशासन को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से घटनास्थल तक पहुंचना पड़ा.
तकनीकी जांच और संदेह के पहलू
हादसे के बाद विमान के दोनों इंजन और प्रोपेलर पंखों से अलग होकर दूर-दूर पाए गए. एक इंजन मुख्य मलबे से करीब 250 मीटर दूर मिला, जबकि दूसरा लगभग 640 मीटर दूर पाया गया. इससे संकेत मिलता है कि हादसा बेहद तेज और विनाशकारी था. इसके अलावा, रांची में भरे गए ईंधन के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा गया है, ताकि किसी तकनीकी गड़बड़ी या ईंधन से जुड़ी समस्या की संभावना को खारिज किया जा सके. गौर करने वाली बात यह भी है कि विमान का आखिरी निरीक्षण 20 जनवरी 2026 को ही किया गया था.
मौसम और रूट बदलाव की भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि खराब मौसम के कारण पायलट ने उड़ान के तुरंत बाद रूट बदलने की अनुमति मांगी थी, जिसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने मंजूरी दे दी थी. इसके बाद क्या हुआ, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है. विशेषज्ञ इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या मौसम की स्थिति इस हादसे का कारण बनी या फिर कोई तकनीकी खराबी इसके पीछे जिम्मेदार थी.
जांच जारी, जवाब का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले की गहन जांच जारी है और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है. हादसे के असली कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके. शुरुआती रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब अब अंतिम जांच रिपोर्ट में मिलने की उम्मीद है.

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