जमशेदपुर से पढ़े कुल मान घिसिंग होंगे नेपाल के नए प्रधानमंत्री!... सुशीला कार्की रेस से बाहर
कुल मान घिसिंग नेपाल में अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री हो सकते हैं. Zen Z ने उन्हें देशभक्त और सबका चहेता बताते हुए प्रधानमंत्री के लिए उनका नाम आगे किया था. कुल मान घिसिंग का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है. वहीं कल तक प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे रही सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला...


कुल मान घिसिंग नेपाल में अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री हो सकते हैं. Zen Z ने उन्हें देशभक्त और सबका चहेता बताते हुए प्रधानमंत्री के लिए उनका नाम आगे किया था. कुल मान घिसिंग का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है. वहीं कल तक प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे रही सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कर्की रेस से बाहर हो चुकी हैं. कुल मान घिसिंग को नेपाल में बिजली संकट का हल निकालने के लिए जाना जाता है. खास बात ये है कि वे लंबे समय तक भारत में रहे हैं. उन्होंने जमशेदपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. उसके बाद 1994 में नेपाल बिजली बोर्ड (NEA) को ज्वाइन किया था.
कौन हैं कुल मान घिसिंग
54 वर्षीय कुल मान घिसिंग नेपाल के बिजली बोर्ड (NEA) के पूर्व प्रमुख हैं. उन्होंने काठमांडू घाटी में लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती का हल खोजते हुए इस समस्या को खत्म किया था. इसके लिए उनकी खूब तारीफ हुई थी. हालांकि नेपाल सरकार ने ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का से मतभेद के बाद मार्च में कुल मन के पद से बर्खास्त कर दिया था. कुल मान के सरकार विरोधी रुख ने उनको युवाओं के बीच पहचान दिलाई थी. ऐसे में भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से कुल मान का नाम अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए पेश किया गया है. उनका भारत से भी खास नाता है. कुल मान ने जमशेदपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.
सुशीला कार्की ने इसलिए लिया नाम वापस
कुल मान से पहले सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री के दावेदार के तौर पर सामने आया था. आज सुबह तक उनका नाम प्रधानमंत्री के लिए फाइनल बताया जा रहा था, लेकिन दोपहर में उनका नाम इस रेस से हटाकर कुल मान को आगे किया गया. इसमें सुशीला की उम्र समेत कई कारक माने जा रहे हैं. कार्की शुरुआत से ही अंतरिम प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती थीं. उन्हें मनाने के लिए सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने बुधवार की देर रात उनके घर पहुंचे थे. रात 2 बजे तक उनके धापासी स्थित आवास पर लंबी बातचीत चली. उन्होंने युवाओं और सेना के औपचारिक अनुरोध पर हामी भरी थी. लेकिन बाद में राजनीतिक मतभेद और सार्वजनिक आलोचनाओं के चलते उन्होंने नाम वापस ले लिया.

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