ममता बनर्जी को बड़ा झटका! टीएमसी सांसद काकोली घोष ने छोड़े सभी पद, पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप
“तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. बारासात से सांसद काकोली घोष ने अपने इस्तीफे में पार्टी के भीतर बढ़ती अनियमितताओं, ”

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. बारासात से सांसद काकोली घोष ने अपने इस्तीफे में पार्टी के भीतर बढ़ती अनियमितताओं, भ्रष्टाचार के आरोपों और नेतृत्व के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं. हालांकि उन्होंने साफ किया है कि वह फिलहाल पार्टी नहीं छोड़ रही हैं और सांसद के तौर पर काम जारी रखेंगी. हाल ही में उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था, जिसके बाद से ही पार्टी के अंदर नाराजगी की चर्चा तेज हो गई थी. अब उनके इस्तीफे ने बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है.
महिला सांसदों के मुद्दे पर जताई नाराजगी
काकोली घोष ने कहा कि पार्टी के भीतर महिला सांसदों के साथ कई बार अनुचित व्यवहार हुआ, लेकिन नेतृत्व की ओर से कभी गंभीर पहल नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि कई मौकों पर उन्हें अपेक्षित सहयोग और संवेदनशीलता नहीं मिली. काकोली ने कहा कि ऐसे माहौल में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाना अब उनके लिए संभव नहीं रह गया था. उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक मानसिक द्वंद्व में रहने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया.
भ्रष्टाचार और घोटालों पर उठाए सवाल
अपने बयान में सांसद ने राशन वितरण घोटाले, शिक्षक भर्ती विवाद और अन्य वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन मामलों ने आम लोगों के बीच सरकार और पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. काकोली घोष के मुताबिक लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनकी अंतरात्मा को झकझोर दिया. उन्होंने कहा कि जनता के मन में गुस्सा और अविश्वास बढ़ता जा रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का भी जिक्र
काकोली घोष ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित मामले को भी उठाया. उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टर की संदिग्ध मौत और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों ने पूरे समाज को हिला दिया. इस घटना ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है और उसी भावना के तहत उन्होंने यह कदम उठाया है.
चुनावी रणनीति और नेतृत्व शैली पर भी सवाल
टीएमसी सांसद ने पार्टी की कार्यशैली और चुनावी रणनीति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि पार्टी की लोकतांत्रिक संस्कृति धीरे-धीरे कमजोर हो रही है और बाहरी प्रभाव संगठन पर हावी होते जा रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाल ही में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने के बाद से ही पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज था. अब उनके इस्तीफे को बंगाल की राजनीति में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.



