तृणमूल में महासंग्राम! काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर लगाए गाली-गलौज और अपमान के गंभीर आरोप
“तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद ने अब खुली सियासी लड़ाई का रूप ले लिया है. पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सांसद कल्याण बनर्जी के बीच चल रही तनातनी अब लोकसभा स्पीकर के दरवाजे तक पहुंच गई है.”

तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विवाद ने अब खुली सियासी लड़ाई का रूप ले लिया है. पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सांसद कल्याण बनर्जी के बीच चल रही तनातनी अब लोकसभा स्पीकर के दरवाजे तक पहुंच गई है. काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर संसद परिसर में अभद्र भाषा और महिला सांसदों के प्रति अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष को फिर से सामने ला दिया है. खास बात यह है कि हाल के दिनों में काकोली घोष लगातार पार्टी नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों पर नाराजगी जाहिर करती रही हैं. उन्होंने पार्टी के कई पदों से इस्तीफा भी दे दिया है. वहीं, कल्याण बनर्जी को संगठन में बढ़ती जिम्मेदारियां मिलने के बाद दोनों नेताओं के बीच टकराव और तेज हो गया है. अब मामला सिर्फ व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संसद की गरिमा और पार्टी अनुशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं.
स्पीकर तक पहुंचा विवाद
काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका आरोप है कि संसद के भीतर और राजनीतिक बैठकों के दौरान उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया. काकोली का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि महिला सांसदों की गरिमा से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने स्पीकर से मामले की जांच कर उचित कदम उठाने की अपील की है. वहीं, कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया है. उनका कहना है कि पार्टी के अंदर कुछ फैसलों को लेकर असंतोष जरूर है, लेकिन इसे अनावश्यक रूप से बड़ा बनाया जा रहा है. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर विवादित बयान देने से इनकार नहीं किया.
पद बदलने के बाद बढ़ी तनातनी
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह विवाद उस समय और गहरा हो गया जब लोकसभा में मुख्य सतर्कता अधिकारी की जिम्मेदारी काकोली घोष से लेकर कल्याण बनर्जी को दे दी गई. राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इसी फैसले के बाद काकोली की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी. सूत्रों के मुताबिक, काकोली खुद को संगठन में लगातार कमजोर किए जाने से असहज महसूस कर रही थीं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भी कई बार अपनी नाराजगी जाहिर की. इसके बाद उन्होंने पार्टी के कुछ अहम पदों से इस्तीफा देकर नेतृत्व को साफ संदेश देने की कोशिश की.
सोशल मीडिया से संसद तक छिड़ी जंग
दोनों नेताओं के बीच विवाद पहले सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों तक सीमित था, लेकिन अब यह खुलकर राजनीतिक टकराव में बदल चुका है. काकोली घोष ने हाल के इंटरव्यू और मीडिया बातचीत में पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला सांसदों को कई बार अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है, लेकिन पार्टी स्तर पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होती. दूसरी ओर, कल्याण बनर्जी के समर्थक इसे व्यक्तिगत नाराजगी और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर देख रहे हैं.
तृणमूल के लिए बढ़ी मुश्किल
इस पूरे विवाद ने तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी पहले ही कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है. ऐसे में सांसदों के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप विपक्ष को हमला बोलने का मौका दे सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी नेतृत्व ने समय रहते इस विवाद को नियंत्रित नहीं किया, तो इसका असर संगठन और संसद दोनों जगह दिखाई दे सकता है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि लोकसभा स्पीकर इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं और तृणमूल नेतृत्व इस अंदरूनी संघर्ष को कैसे संभालता है.



