देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस खास मौके पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी नज़र आए, जो कि 21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर दिखे. धनखड़ ने 9 सितंबर को सीपी राधाकृष्णन को बधाई देते हुए एक सार्वजनिक बयान ज़रूर जारी किया था, लेकिन शुक्रवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया, जो उनके इस्तीफे के बाद से लगाई जा रही थीं. विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि वे कहां हैं और किस हालत में हैं.
समारोह में धनखड़ एक मेहमान की तरह पहुंचे और पूर्व राष्ट्रपतियों वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी के साथ अगली पंक्ति में बैठे दिखे. उनकी मौजूदगी समारोह का विशेष आकर्षण रही. इस मौके पर देश के कई बड़े नेता उपस्थित थे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और नितिन गडकरी सहित कई केंद्रीय मंत्री शामिल हुए.
इसके अलावा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ओडिशा के सीएम मोहन माझी, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.
सीपी राधाकृष्णन को 9 सितंबर को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में 452 वोट मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को सिर्फ 300 वोट हासिल हुए. शपथ ग्रहण समारोह को शुभ मुहूर्त देखकर आयोजित किया गया था, ऐसा एनडीए सूत्रों का कहना है.
उपराष्ट्रपति बनने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल थे. अब इस पद का अतिरिक्त प्रभार गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को सौंपा गया है. राधाकृष्णन को तमिलनाडु में "मोदी के रूप" में भी जाना जाता है. वह कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और भाजपा की तमिलनाडु इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. इस समारोह ने न केवल नए उपराष्ट्रपति के आगमन को चिह्नित किया, बल्कि लंबे समय से अज्ञात रहे पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की सार्वजनिक वापसी भी दर्ज की.





