CBI के ज्वाइंट डायरेक्टर बने IPS कुलदीप द्विवेदी झारखंड में दिखा चुके हैं सिंघम अवतार, AK 47 लेकर नंगे पांव शूटर्स को दबोचा था
Ranchi: झारखंड कैडर के IPS अफसर कुलदीप द्विवेदी को सीबीआई का ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया है. कुलदीप द्विवेदी झारखंड कैडर के 2005 बैच के IPS अफसर हैं. उनका कार्यकाल 17 जनवरी 2026 तक रहेगा, जब तक वे पांच वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी नहीं कर लेते या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो. फिलहाल कुलदीप द्विवेद...


Ranchi:
झारखंड कैडर के IPS अफसर कुलदीप द्विवेदी को सीबीआई का ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया है. कुलदीप द्विवेदी झारखंड कैडर के 2005 बैच के IPS अफसर हैं. उनका कार्यकाल 17 जनवरी 2026 तक रहेगा, जब तक वे पांच वर्ष की प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी नहीं कर लेते या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो. फिलहाल कुलदीप द्विवेदी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. वे रांची के एसएसपी के पद पर भी अपनी सेवा दे चुके हैं. गढ़वा समेत कई जिलों में एसपी के पद पर भी कार्ररत रहे थे. कुलदीप द्विवेदी की छवि एक तेज तर्रार आईपीएस अफसर हैं. झारखंड में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई बार सिंघम अवतार दिखाया है.
शूटर्स को पकड़ने कीचड़ में उतर गये थे
2017 के अक्टूबर महीने की यह घटना है. उस वक्त कुलदीप द्विवेदी रांची के एसएसपी थे. पुलिस को सूचना मिली कि एक बिल्डर की हत्या करने की नियत से कुछ शूटर्स शहर में आए हैं. पुख्ता सूचना के आधार पर रांची पुलिस की एक टीम ने अपराधियों को घेर लिया. पुलिस को देखते ही अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी. धुर्वा इलाके में हुए इस मुठभेड़ में पुलिस टीम का नेतृत्व एसएसपी कुलदीप द्विवेदी कर रहे थे. एसएसपी खुद नंगे पांव हाथों में एके-47 लिए झाड़ियों के बीच कीचड़ में उतर पड़े. आखिरकार पुलिस ने तीन अपराधियों को पकड़ने में सफलता हासिल कर ली. इसके बाद कुलदीप द्विवेदी की खूब तारीफ हुई थी.
IED ब्लास्ट में बाल-बाल बचे थे
2005 में आईपीएस बनने के बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला. बोकारो में प्रोबेशन के बाद पहली पोस्टिंग गिरिडीह में मिली. जहां एएसपी के तौर पर उन्होंने अपनी सेवा दी. पोस्टिंग के दो महीने के भीतर CPI के माओवादियों से मुठभेड़ होने लगी. उनके करियर का बड़ा हिस्सा माओवादी इलाकों में ही कटा. वे रांची के रुरल एसपी भी बनाए गए. तब उनके ऑपरेशन कुंदन पाहन के खिलाफ होने लगे. 2009 में कुलदीप माओवादियों के किए एक आईईडी ब्लास्ट में बाल-बाल बचे थे. इस हमले में उनके 6 साथी शहीद हुए. वहीं 2010 में उन्हें माओवादियों के खिलाफ चलाए ऑपरेशन 'तूफान' के लिए सीएम का गैलेंट्री अवॉर्ड मिला. 2011 में बोकारो का एसपी रहते हुए उन्होंने माफिया इलियास चौधरी की बादशाहत खत्म की थी. पर कार्रवाई की. इलियास की ओर स्मग्लिंग में तूती बोलती थी, लेकिन कुलदीप द्विवेदी के डर से वो बंगाल भाग गया, लेकिन उन्होंने बंगाल में भी उसे नहीं छोड़ा. वहां से गिरफ्तार कर झारखंड लाया.

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