रात के अंधेरे में ACB ने उत्पाद विभाग से उठाये ट्रक भर कागजात!... बाबूलाल ने सीएम से पूछे सवाल
- Posted on August 29, 2025
- झारखंड
- By Bawal News
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उत्पाद विभाग के दफ्तर से आधी रात ट्रक भरकर कागजात क्यों हटाए गए? क्या एसीबी और उत्पाद विभाग के भीतर किसी बड़े भ्रष्ट खेल की तैयारी चल रही है? क्या कुछ चुनिंदा अधिकारियों और राजनीतिक सरगनाओं को बचाने के लिए यह सब किया गया है. यह कुछ सवाल हैं जो बीजेपी ने सरकार से पूछा है. झारखंड में कथित शराब घोटाले की जांच चल रही है. एंटी करप्शन ब्यूरो ने सीनियर आईएएस विनय चौबे समेत कई अफसरों को धड़ाधड़ इस मामले में पकड़कर जेल में डाल दिया, लेकिन तीन महीने में एसीबी चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई, जिसके कारण आरोपियों को एक-एक कर जमानत मिल रही है. विपक्ष इस मामले में सरकार और एंटी करप्शन ब्यूरो पर कई गंभीर आरोप लगा रही है. इसी बीच खबर ये है कि रात के अंधेरे में एसीबी उत्पाद विभाग से ट्रक भरकर कागजात ले गई है. अब यह खबर सामने आते ही फिर से राजनीति गर्म हो गई है.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से एक-एक कर कई सवाल दाग दिये हैं और डीजीपी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. बाबूलाल ने कहा कि मंगलवार की रात एक चौंकाने वाली घटना की जानकारी मिल रही है. हमें बताया गया है कि उत्पाद विभाग से एसीबी के अधिकारी भारी मात्रा में कागजात रात के अंधेरे में ले जाए गए है. यह किसी भी प्रकार की सामान्य डे-टू-डे प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह से गुप्त और संदिग्ध परिस्थितियों में अंजाम दिया गया. आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई राज्य में अवैध रूप से पद पर बैठे डीजीपी के सीधे हस्तक्षेप एवं निगरानी में हुई.
बाबूलाल ने आशंका जताई है कि यह कदम सीधे-सीधे शराब घोटाले के महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने और आने वाले समय में ED या CBI की एंट्री से पहले जमीन तैयार करने का प्रयास प्रतीत होता है. यानी भ्रष्टाचार और घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे राज्य की जनता के हितों की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि एक भी साक्ष्य नष्ट न हो. जनता यह जानने का हक रखती है कि—किसे बचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है और किसके इशारे पर सबूत मिटाए जा रहे हैं. क्या किसी भी विभाग के काग़ज़ात बिना फ़ोटो स्टेट करवाये एवं विधिवत विस्तार पूर्वक ज़ब्ती सूचि बनवाये बिना रात के अंधेरे में गुप-चुप तरीक़े से उठाकर ले जाने का प्रावधान है? यह सब मुख्यमंत्री कि जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं?
बाबूलाल ने मुख्यमंत्री से इस मामले में संज्ञान लेने को कहा है. उन्होंने सीएम को चेताते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि चाहे चोर कितना भी चालाक और शातिर क्यों न हो, अंततः कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है. यही सुराग एक दिन पूरे खेल को बेनकाब करेंगे.
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