छत्तीसगढ़ के कांकेर में डी-माइनिंग के दौरान IED धमाका, 3 जवान शहीद
“छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में डी-माइनिंग अभियान के दौरान एक IED विस्फोट में 3 DRG जवान शहीद हो गए, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है. यह हादसा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों के चल रहे ऑपरेशन के दौरान हुआ.”

कांकेर, छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे डी-माइनिंग अभियान के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया. बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने के मिशन पर निकली डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG) टीम उस समय हादसे का शिकार हो गई, जब एक IED को डिफ्यूज करते समय अचानक विस्फोट हो गया. इस धमाके में तीन बहादुर जवानों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया. यह घटना कांकेर और नारायणपुर की सीमा के पास हुई, जो लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. सुरक्षा बल लगातार इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए अभियान चला रहे हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं इस चुनौतीपूर्ण लड़ाई की गंभीरता को दर्शाती हैं.
डी-माइनिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा
घटना उस समय हुई जब छोटेबेठिया थाना क्षेत्र से एक टीम को बारूदी सुरंगों को खोजने और निष्क्रिय करने के लिए भेजा गया था. अभियान के दौरान एक संदिग्ध IED को डिफ्यूज करने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी अचानक उसमें विस्फोट हो गया. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह IED पहले माओवादी विद्रोहियों द्वारा लगाया गया था. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मौके पर मौजूद चार जवान उसकी चपेट में आ गए.
शहीद जवानों की पहचान और घायल की स्थिति
इस हादसे में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और कांस्टेबल संजय गढ़पाले शहीद हो गए. वहीं, कांस्टेबल परमानंद कोमरा गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है. शहीद जवानों की खबर से पूरे सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है. इन जवानों ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया.
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लगातार जारी अभियान
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज के अनुसार, हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों की मदद से सैकड़ों IED बरामद कर निष्क्रिय किए हैं. उन्होंने इस घटना को एक “दुखद हादसा” बताया और कहा कि इलाके को सुरक्षित बनाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे. यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करना कितना जोखिम भरा है, और सुरक्षा बल किस तरह हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.




