छत्तीसगढ़ शराब घोटाला में IAS विनय चौबे और गजेंद्र सिंह गिरफ्तार, लंबी पूछताछ के बाद ACB ने किया अरेस्ट
रांची: छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में ACB ने झारखंड के IAS अधिकारी विनय चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. ACB ऑफिस में लंबी पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिये जाने के बाद उनका वहीं मेडिकल चेकअप कराया गया. इससे पहले ACB की टीम आज सुबह ...


रांची:
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में ACB ने झारखंड के IAS अधिकारी विनय चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. ACB ऑफिस में लंबी पूछताछ के बाद दोनों को हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिये जाने के बाद उनका वहीं मेडिकल चेकअप कराया गया. इससे पहले ACB की टीम आज सुबह विनय चौबे के घर पहुंची थी और उन्हें लेकर एसीबी की टीम दफ्तर गई थी. एसीबी ऑफिस में संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह के सामने बैठाकर उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई.
ईडी भी कर चुकी है पूछताछ
यह मामला तब का है जब विनय चौबे उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव थे. उनके कार्यकाल में कथित तौर पर यह शराब घोटाला हुआ है. विनय चौबे से इस मामले में इससे पहले भी छत्तीसगढ़ ईडी ने पूछताछ की थी. ईडी को दिये गये अपने बयान में विनय चौबे ने कहा था कि नई उत्पाद नीति सरकार की सहमति के बाद लागू की गई थी. इसमें उनका कोई दोष नहीं है.
2022 में हुआ था खेल
मार्च 2022 में झारखंड में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित उत्पाद नीति लागू हुई थी. झारखंड की पूर्व की उत्पाद नीति को राजस्व की कसौटी पर फ्लॉप बताकर पूरा गेम प्लान तैयार हुआ था. इसको लेकर रायपुर में बैठक भी हुई थी. नई नीति के बनते ही छत्तीसगढ़ का सिंडेकेट सक्रिय हो गया था. इस दौरान नकली होलोग्राम और अवैध शराब की सप्लाई कर राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया था इस घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई अन्य आरोपी बनाये गये हैं.
विकास सिंह ने दर्ज कराया था मामला
रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र निवासी विकास सिंह के बयान के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने जांच के बाद यह मामला दर्ज किया था. रांची का विकास सिंह वह व्यक्ति है जिसने छत्तीसगढ़ के अधिकारी अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी तथा अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि शराब घोटाला करके छत्तीसगढ़ सरकार को अरबों रुपयों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया है. विकास सिंह का कहना है कि झारखंड में जो शराब नीति बदली गयी थी, उसका बदलाव इसी सिंडिकेट में शामिल झारखंड के अधिकारियों ने करवाया है.

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