जामताड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल! एंबुलेंस नहीं मिली तो ट्रैक्टर पर अस्पताल पहुंचाया मरीज, मंत्री के सामने बेटे ने खोल दी पूरी कहानी
झारखंड के जामताड़ा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजनों को मजबूरी में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा.

Jamtara: झारखंड के जामताड़ा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली तो परिजनों को मजबूरी में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा. लेकिन अस्पताल पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई. मामला यहीं नहीं रुका. जब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जामताड़ा पहुंचे और पूरे मामले को लेकर अपनी बात रख रहे थे, तभी मृतक के बेटे ने सार्वजनिक रूप से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा दिए. कैमरों के सामने हुई इस घटना ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में ला दिया है.
"108 पर फोन करते रहे, कोई नहीं आया"
मृतक के परिजनों का आरोप है कि मरीज की हालत बिगड़ने के बाद उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने की कोशिश की. परिवार का दावा है कि बार-बार मदद मांगने के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची. जब हालत लगातार बिगड़ती गई तो गांव वालों की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम किया गया और मरीज को खटिया पर लिटाकर अस्पताल ले जाया गया. परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी.
मंत्री के सामने फूटा परिवार का गुस्सा
जामताड़ा स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला भी है. ऐसे में जब मंत्री मौके पर पहुंचे तो उम्मीद थी कि वे मामले को लेकर जवाब देंगे. लेकिन इसी दौरान मृतक के बेटे ने सामने आकर पूरी घटना का जिक्र किया और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी यह चर्चा रही कि अगर आपातकालीन सेवा समय पर पहुंचती तो हालात अलग हो सकते थे. हालांकि प्रशासन की ओर से अभी जांच पूरी नहीं हुई है.
बड़े-बड़े दावे, लेकिन जमीन पर सवाल
दिलचस्प बात यह है कि हाल के महीनों में झारखंड सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, एंबुलेंस नेटवर्क सुधारने और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणाएं करती रही है. राज्य स्तर पर एंबुलेंस सेवा को बेहतर बनाने और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था की बात भी कही गई थी. लेकिन जामताड़ा की यह घटना दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं.
जांच के आदेश, लेकिन उठ रहे बड़े सवाल
सिविल सर्जन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. जांच में यह देखा जाएगा कि क्या वास्तव में 108 सेवा को कॉल किया गया था, कॉल का रिकॉर्ड क्या है और एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंची. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 2026 में भी ट्रैक्टर और खटिया का सहारा लेना पड़े, तो फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों का क्या मतलब रह जाता है? अब पूरे राज्य की नजर जांच रिपोर्ट पर है. क्योंकि यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की जवाबदेही का है, जिस पर लाखों लोग अपनी जिंदगी बचाने के लिए भरोसा करते हैं.

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