राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज, झामुमो-भाजपा में जुबानी जंग
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है. झामुमो ने अपने विधायकों को लेकर भरोसा जताते हुए एकजुटता का दावा किया है, जबकि भाजपा ने महागठबंधन पर तंज कसते हुए एनडीए उम्मीदवार की जीत का दावा किया है. राजद की अनुपस्थिति और भीतरघात की अटकलों ने सियासत को और तेज कर दिया है.

झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. दो सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के मैदान में उतरने और एनडीए द्वारा उन्हें समर्थन दिए जाने के बाद मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है. वहीं इंडिया ब्लॉक में शामिल दलों के पास संख्या बल होने के बावजूद हॉर्स ट्रेडिंग और भीतरघात की आशंका को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने सभी विधायकों पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्हें “खरा सोना” बताया है और किसी भी तरह की रणनीतिक दिक्कत से इनकार किया है. दूसरी ओर भाजपा ने महागठबंधन में अंतर्कलह का आरोप लगाते हुए एनडीए उम्मीदवार की जीत का दावा किया है. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है.
झामुमो ने जताया विधायकों पर भरोसा
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने सभी 34 विधायकों पर पूर्ण विश्वास जताया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और किसी भी प्रकार की रिसोर्ट पॉलिटिक्स या रणनीतिक दबाव की जरूरत नहीं है. झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि सभी विधायक आंदोलन की उपज हैं और नेतृत्व के हर निर्णय का पालन करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने विधायकों की निष्ठा और एकजुटता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है.
भाजपा का महागठबंधन पर तंज
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोला है. भाजपा प्रवक्ता अविनेश कुमार सिंह ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी की जीत सुनिश्चित है. उन्होंने महागठबंधन की संयुक्त प्रेस वार्ता में राजद नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर भी तंज कसा और इसे अंदरूनी कलह का संकेत बताया. भाजपा ने यह भी कहा कि कई विधायक राज्य और देशहित में एनडीए उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं.
कांग्रेस और रणनीति पर चर्चा
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि कांग्रेस एक स्वतंत्र पार्टी है और वह अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी रणनीति खुद तय कर सकती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए अलग व्यवस्था कर सकती है. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में और अटकलें तेज हो गई हैं.
राजद की अनुपस्थिति पर सियासी सवाल
महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से राजद की दूरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. झामुमो नेताओं ने कहा कि इसका जवाब राजद को देना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अनुपस्थिति का मतलब अलगाव नहीं है. वहीं भाजपा ने इसे गठबंधन के भीतर मतभेद और अस्थिरता का प्रमाण बताया है, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है.

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