सिपाही भर्ती घोटाले में ED का एक्शन, पेपर छपाई से जुड़े मनी ट्रेल पर कसा शिकंजा
सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2.01 करोड़ रुपये की पांच अचल संपत्तियां जब्त की हैं. जांच में प्रश्नपत्र छपाई के लिए दिए गए 5.90 करोड़ रुपये के ठेके और फर्जी कंपनियों के खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है.

सिपाही भर्ती पेपर लीक मामला: सिपाही भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत कार्रवाई की है. एजेंसी ने करीब 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है. जांच का दायरा प्रश्नपत्र छापने वाली कंपनियों से लेकर करोड़ों रुपये के भुगतान और संदिग्ध बैंक खातों तक पहुंच गया है. शुरुआती जांच में NC प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड और कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स का नाम सामने आया है. आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी से जुड़ी पाबंदियों से बचने के लिए नई कंपनी बनाई गई और बिना प्रिंटिंग का अनुभव रखने वाली कंपनी को प्रश्नपत्र छापने का ठेका दे दिया गया. इस काम के बदले 5.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया गया.
2.01 करोड़ की संपत्तियों पर ED की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने सिपाही भर्ती पेपर लीक प्रकरण में पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है. इनकी कुल कीमत करीब 2.01 करोड़ रुपये बताई गई है. जांच एजेंसी के अनुसार, ये संपत्तियां NC प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज थीं. अब इनके खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत की जांच की जा रही है.
ब्लैकलिस्टेड कंपनी से बचने के लिए बनाई गई नई फर्म!
जांच में एक अहम पहलू सामने आया है. बताया जा रहा है कि पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर लगी पाबंदियों से बचने के लिए NC प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड नाम से नई कंपनी बनाई गई थी. ED इस बात की जांच कर रही है कि कंपनी के गठन के पीछे किन लोगों की भूमिका थी और इसका इस्तेमाल भर्ती परीक्षा से जुड़े कामों में किस तरह किया गया.
बिना अनुभव वाली कंपनी को मिला 5.90 करोड़ का ठेका
प्रश्नपत्रों की छपाई का काम कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को सौंपा गया था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कंपनी के पास प्रिंटिंग के क्षेत्र में पहले से कोई खास अनुभव नहीं था. इसके बावजूद उसे परीक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण काम दिया गया. प्रश्नपत्रों की छपाई के एवज में कंपनी को करीब 5.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसी ठेके को लेकर अब वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की जांच हो रही है.
फर्जी कंपनियों के जरिए नकदी में बदली गई रकम
ED को जांच के दौरान करीब 2.01 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांसफर की जानकारी मिली है. आरोप है कि इस रकम को अलग-अलग फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में भेजा गया और बाद में नकदी के रूप में निकाला गया. जांच एजेंसी अब संबंधित खातों, लेन-देन और रकम प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है. इस प्रक्रिया के जरिए कथित मनी ट्रेल की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
कोलकाता से पटना पहुंचने से पहले लीक हुआ था पेपर
सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाए जाने के दौरान लीक होने की बात सामने आई थी. इस घटना के बाद परीक्षा से जुड़ी प्रिंटिंग व्यवस्था और अन्य संबंधित गतिविधियां जांच के दायरे में आ गईं. ED अब कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, ठेके की प्रक्रिया और संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल कर रही है. पांच संपत्तियों की अस्थायी जब्ती इसी जांच का हिस्सा है. मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी.

