पहले सेक्रेटरी साहब के तेवर थे गर्म, आज थोड़े नरम-नरम, जानें कैसे...
नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने 16 अगस्त को कहा था कि कांटाटोली फ्लाईओवर का काम 15 सितंबर तक नहीं हुआ तो एक दिन भी एक्सटेंशन नहीं मिलेगा. 15 सितंबर आकर चला गया. न कंपनी ने काम पूरा किया और न सचिव ने कंपनी पर वादे के मुताबिक कार्रवाई की.


रांची
:
सरकारी विभागों में
‘
सिस्टम
’
वो चीज है जो एक बार बन गया तो बस बन गया. झारखंड में भी एक सिस्टम बना हुआ है. सालों से चले आ रहे इस सिस्टम को बदलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. मुख्यमंत्री, मंत्री, अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार सभी इसी सिस्टम का हिस्सा हैं. हम और आप जानते हैं कि इस सिस्टम का कंट्रोल सरकार के हाथ में है, लेकिन असल में पर्दे के पीछे सिस्टम पर कंट्रोल ठेकेदारों का है. कुछ अधिकारी इस सिस्टम को बदलने के लिए क्रांतिकारी तेवर लेकर आते जरूर हैं, लेकिन सिस्टम को नहीं बदल पाते और खुद बदल जाते हैं. नगर विकास विभाग के वर्तमान सचिव सुनील कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. 14 अगस्त को उन्होंने नगर विकास विभाग के सचिव का पदभार ग्रहण किया. 16 अगस्त को रांची के कांटाटोली फ्लाईओवर का निरीक्षण करने पहुंचे. फ्लाईओवर निर्माण की धीमी गति पर नाराजगी जताई. पदाधिकारियों को फटकार लगाई. कहा 15 सितंबर तक की डेडलाइन दे रहे हैं. काम कंप्लीट नहीं हुआ तो एक दिन का भी एक्सटेंशन नहीं देंगे और कंपनी पर कार्रवाई करेंगे.
15 सितंबर बीत गया, नहीं हुई कार्रवाई
15 सितंबर आकर चला गया. न कंपनी ने काम पूरा किया और न विभाग ने कंपनी पर वादे के मुताबिक कार्रवाई की. सचिव की फटकार के बाद जुडको और फ्लाईओवर का काम कर रही दिनेश अग्रवाल एंड संस कंपनी जल्द से जल्द काम निपटाने के बजाए एक्सटेंशन लेने के जुगाड़ में लग गये. जुडको से लेकर मंत्रालय तक फाइलें दौड़ने लगी. दर्जनों बहाने बनाकर कंपनी फिर से एक्सटेंशन लेने में कामयाब रहा. 15 सितंबर का डेडलाइन खत्म होने के 8 दिन बाद सचिव फिर से कांटाटोली फ्लाईओवर में प्रकट हुए, लेकिन इस बार उनके तेवर बदले-बदले से थे. बड़ी नरमी से उन्होंने एजेंसी को 30 सितंबर तक फ्लाईओवर को चलायमान करने का निर्देश दिया.
7 दिन में कैसे कंप्लीट होगा इतना काम
नगर विकास विभाग हर हाल में सितंबर तक फ्लाईओवर को चालू करना चाह रहा है. सितंबर खत्म होने में अब सिर्फ 7 दिन बचे हैं, लेकिन अभी भी कई काम बाकी हैं. फ्लाईओवर पर सभी 486 प्रीकास्ट सेगमेंटल बॉक्स चढ़ चुके हैं. उन्हें विशेष ग्लू (गोंद) से जोड़ा जा चुका है. सेगमेंटल बाक्स को सड़क का रूप देने के लिए 50 एमएम का बिटुमिन का स्तर लगाया जा चुका है, लेकिन अभी बिटुमिन के ऊपर 25 एमएम मास्टिक अस्फाल्ट का लेयर चढ़ाने का काम कंप्लीट नहीं हुआ है. फ्लाईओवर पर 125 खंभों में लाइट लगाया जा रहा है. यह भी अभी कंप्लीट नहीं हुआ है. माइनर ब्रिज का काम भी पूरा नहीं हुआ है. फ्लाईओवर पर यातायात शुरू कराने के बाद खादगढ़ा बस स्टैड के प्रवेश द्वार के पास नामकुम एवं बस स्टैंड की ओर जाने के लिए रैंप बनाने का काम भी कंप्लीट नहीं हुआ है. लालपुर की ओर जाने के लिए पेट्रोल पंप के पास एक रैंप बनना है. वह भी कंप्लीट नहीं है. 7 दिन में यह सभी काम कंप्लीट होंगे इसकी उम्मीद कम है. हो सकता है ठेकेदार एक और एक्सटेंशन लेने में कामयाब हो जाए.

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