धनबाद: जमीन धंसने से मकान ढहा, 3 की मौत, अवैध खनन पर विवाद
“झारखंड के धनबाद में अचानक जमीन धंसने से टांडाबारी बस्ती का मकान ढह गया, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य मलबे में दब कर मौत के शिकार हो गए. प्रशासन और BCCL राहत‑बचाव में जुटे हैं. अवैध खनन और लगातार बारिश को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है.”

Dhanbad : झारखंड के धनबाद जिले में 31 मार्च की शाम एक भयानक हादसा हुआ, जब अचानक जमीन धंसने से सोनारडीह ओपी के टांडाबारी बस्ती का एक मकान जमींदोज हो गया, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्य मलबे में दब कर दर्दनाक मौत के शिकार हो गए. स्थानीय लोग इस घटना को भू धंसान (land subsidence) का परिणाम बता रहे हैं, जो लगातार बारिश और इलाके में कथित अवैध खनन के कारण हुआ. हादसे में मलबे से शव निकालने के बाद मृतकों की पहचान 70 वर्षीय मोनू उरांव, 17 वर्षीय गीता कुमारी और 35 वर्षीय सरिता देवी के रूप में हुई. क्षेत्र के ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं ने प्रशासन और खनन कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि अवैध कोयला उत्खनन और बीसीसीएल के आसपास कच्चे मुहाने खुला छोड़ देने से जमीन कमजोर हो गई थी, जिससे यह भूस्खलन हुआ. दूसरे पक्ष से पुलिस और प्रशासन लगातार जांच में जुटे हैं और राहत बचाव कार्य जारी है. इस हादसे ने सुरक्षा, पर्यावरण और खनन नियंत्रण पर बहस को फिर से उभार दिया है.
घटना कैसे और कहाँ हुई?
धनबाद जिले के सोनारडीह टांडाबारी बस्ती में मंगलवार शाम अचानक जमीन धंसने लगी, जिससे मिट्टी और मलबा गिरकर कई घरों को जमींदोज कर दिया. स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह भू धंसान तभी हुआ जब दो दिनों तक मूसलाधार बारिश जारी रही. कुछ घरों में तेज आवाज भी सुनी गई, जिसके बाद तुरंत राहत बचाव टीम को बुलाया गया. हादसा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के कोल माइंस जोन के अंतर्गत आता इलाका है, जिसे खनिक गतिविधियों और कमजोर जमीन की वजह से पहले भी जोखिम भरा बताया गया है.
बचाव दल ने मौके पर पहुंच कर मलबे में दबे शवों को निकालने की कार्रवाई की, लेकिन तब तक तीन सदस्यों की मौत हो चुकी थी. स्थानीय अधिकारियों ने आशंका जताई है कि लगातार बारिश और खुले खोदे गए भूमिगत उथले खदान मुहाने भू स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे यह हादसा हुआ.
मृतकों की पहचान और परिवार की स्थिति
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान देर रात करीब दो बजे तीनों शव मलबे से निकाले गए. इनमें 70 वर्षीय मोनू उरांव, उनकी बेटी 17 वर्षीय गीता कुमारी और परिवार की परिचित 35 वर्षीय सरिता देवी शामिल थे. तीनों एक ही परिवार से थे और वह अपने घर में मौजूद थे जब जमीन धंसी और मकान ढह गया. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज दिया है, जबकि परिजन और गांव के लोग अभी भी हादसे की शॉक में हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि घरों में दरारें पहले से ही दिख रही थीं और बारिश के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई थी. यह भी कहा जा रहा है कि कई अन्य परिवारों ने अपने घर छोड़ने का विचार किया है, क्योंकि आसपास कई घरों में भी दरारें दर्ज की जा चुकी हैं.
अवैध खनन और प्रशासन पर उठे सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों ने सोनारडीह ओपी का घेराव किया और राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 32 को जाम कर दिया, ताकि उनकी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया जा सके. उनका आरोप है कि इलाके में लंबे समय से अवैध कोयला खनन जारी है और इसकी वजह से जमीन कमजोर हो गई थी, जिससे यह भू धंसान हुआ.
स्थानीय विधायक शत्रुघ्न महतो ने भी प्रशासन और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया, कहा कि यदि समय रहते अवैध खनन पर रोक लगाई जाती और मुख्यालय स्तर पर सतर्कता दिखायी जाती, तो शायद इतनी बड़ी जानहानि नहीं होती. उन्होंने तुरंत राहत कार्य तेज करने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की.
इस बीच प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि घटना की वजह सिर्फ बारिश भूस्खलन रही, लेकिन ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सतही तौर पर की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और अवैध खनन गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
राहत बचाव, भविष्य की तैयारी और जांच की दिशा
घटनास्थल पर बचाव दल ने राहत बचाव कार्यों के साथ ही प्रभावित घरों के आसपास सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है. स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने क्षेत्र की निगरानी तेज कर दी है और आसपास के घरों में रहने वाले परिवारों को चेतावनी दी है कि वे सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ.
बीसीसीएल की ओर से भी संबंधित इकाइयों को अलर्ट किया गया है, और कंपनी की टीम को खदान मुहानों की स्थिरता की जांच करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा, जिला प्रशासन ने भू महत्व और खनन विशेषज्ञों के साथ मिलकर विस्तृत जांच की घोषणा की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भू धंसान में किन किन कारकों का योगदान था — जैसे कि खनन गतिविधियाँ, बारिश, या भूमिगत संरचना का ढीलापन.
ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास के उपाय किए जाएँ, साथ ही खनन नियंत्रण और पर्यावरण सुरक्षा नीतियों को और मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों.

