Ranchi: धुर्वा से लापता मासूम भाई–बहन अंश और अंशिका की तलाश अब सिर्फ एक पुलिसिया कार्रवाई नहीं रह गई है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बन चुकी है. 12 दिन बीत जाने के बाद भी रांची पुलिस के हाथ खाली हैं, जबकि जनता का गुस्सा और बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब कुख्यात अपराधी और फरार गैंग भी बच्चों की तलाश में सामने आ गए हैं. यह स्थिति कानून-व्यवस्था के लिए न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता पर भी आईना दिखाने वाली है. इस बीच सीआईडी, एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ता और देशभर की पुलिस एजेंसियां भी बच्चों की सकुशल बरामदगी के प्रयासों में जुट गई हैं. वहीं, परिजनों की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है.
12 दिन बाद भी खाली हाथ पुलिस, अपराधी दिखा रहे आईना
दो जनवरी से गायब अंश (5 वर्ष) और अंशिका (4 वर्ष) की तलाश में रांची पुलिस की एक दर्जन से अधिक टीमें जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है. पुलिस की इस नाकामी के बीच सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब कुख्यात अपराधी और गैंग खुद बच्चों को ढूंढने का दावा कर रहे हैं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि जब पुलिस नाकाम दिख रही है, तो अपराधी कैसे सक्रिय हो गए. आम लोग, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन लगातार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं. यह मामला अब सिर्फ एक अपहरण या गुमशुदगी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता की मिसाल बनता जा रहा है.
‘आजाद गैंग’ का इनाम ऐलान, पुलिस से पहले अपराधी मैदान में
वॉन्टेड अपराधी आजाद सरकार के नेतृत्व वाला ‘आजाद गैंग’ भी अंश–अंशिका की तलाश में कूद पड़ा है. सोशल मीडिया के जरिए आजाद सरकार ने बच्चों को खोज निकालने वाले को दो लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है. दिलचस्प बात यह है कि आजाद सरकार खुद पुलिस की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल है और लंबे समय से फरार चल रहा है. दूसरी ओर, रांची पुलिस ने भी बच्चों की जानकारी देने वाले को इनाम देने का एलान किया है और शहरभर में पोस्टर लगाए गए हैं. अपराधियों द्वारा इनाम घोषित किया जाना पुलिस के लिए गंभीर चुनौती और शर्मिंदगी दोनों के रूप में देखा जा रहा है.
सीआईडी की एंट्री, देशभर में ह्यू एंड क्राई नोटिस जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सीआईडी ने भी जांच तेज कर दी है. सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मनोज कौशिक ने देशभर के डीजीपी, पुलिस आयुक्त और आईजी को ह्यू एंड क्राई नोटिस भेजा है. पत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के थानों और बीट हाउस में बच्चों की जानकारी प्रसारित करने को कहा गया है. यह मामला धुर्वा थाना कांड संख्या 01/2026 के तहत दर्ज है और भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) में जांच की जा रही है. सीआईडी ने सूचना देने के लिए ईमेल और मोबाइल नंबर भी जारी किए हैं.
एनजीओ, सामाजिक संगठन और नेताओं की सक्रियता बढ़ी
अंश–अंशिका की तलाश को व्यापक बनाने के लिए पुलिस ने सामाजिक संगठनों और एनजीओ से भी सहयोग मांगा है. एसएसपी के नेतृत्व में नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी द्वारा संचालित बचपन बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधियों सहित कई चाइल्ड वेलफेयर एक्टिविस्ट के साथ बैठक हुई. 20 राज्यों के 439 जिलों में सक्रिय एनजीओ नेटवर्क के जरिए बच्चों की तलाश की रणनीति बनाई गई है. वहीं, परिजनों से मिलने नेताओं का सिलसिला भी जारी है. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने परिवार से मुलाकात कर सरकार पर सवाल उठाए. इस बीच बच्चों के माता-पिता की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाकर जांच भी कराई गई है.


