रांची, धनबाद और साहिबगंज कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, फिर उठे सुरक्षा पर सवाल
“रांची, धनबाद और साहिबगंज के सिविल कोर्ट को एक साथ बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पूरे झारखंड में हड़कंप मच गया है. सोमवार (6 अप्रैल) को ईमेल के जरिए भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. ”

Ranchi: रांची, धनबाद और साहिबगंज के सिविल कोर्ट को एक साथ बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पूरे झारखंड में हड़कंप मच गया है. सोमवार (6 अप्रैल) को ईमेल के जरिए भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं. तीनों जिलों में तुरंत सघन तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस की टीमें शामिल रहीं. हालांकि अब तक किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन बार-बार मिल रही ऐसी धमकियों ने सुरक्षा व्यवस्था और साइबर मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ईमेल धमकी के बाद त्वरित कार्रवाई
तीनों जिलों के कोर्ट परिसरों को एक साथ ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई, जिसके बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई. सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट परिसरों को घेर लिया और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच शुरू कर दी. पूरे परिसर में गहन सर्च ऑपरेशन चलाया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके.
सघन जांच में नहीं मिला कुछ संदिग्ध
बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने कोर्ट परिसरों के कोने-कोने की बारीकी से जांच की, लेकिन किसी भी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई. इससे पहले भी इस तरह की कई धमकियां मिल चुकी हैं, जो जांच के बाद फर्जी साबित हुई थीं. इसके बावजूद पुलिस किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं कर रही है.
पहले की घटनाओं से जुड़ता मामला
झारखंड में पिछले कुछ समय से कोर्ट और अन्य संस्थानों को ईमेल के जरिए धमकियां मिलने का सिलसिला जारी है. हर बार जांच में कुछ ठोस नहीं मिला, लेकिन घटनाओं की पुनरावृत्ति ने इसे गंभीर साइबर अपराध का रूप दे दिया है. सुरक्षा एजेंसियां अब इसे संगठित तरीके से फैलाए जा रहे डर या शरारत के रूप में भी देख रही हैं.
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद नया सवाल
30 मार्च को दिल्ली पुलिस ने मैसूर से श्रीनिवास लूकस नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिस पर देशभर में सैकड़ों नहीं बल्कि करीब 1100 धमकी भरे ईमेल भेजने का आरोप है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब वह आरोपी पहले ही पकड़ा जा चुका है, तो फिर यह नई धमकी किसने भेजी? पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं कोई कॉपीकैट अपराधी या अलग नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है.
धनबाद में भी चला सर्च अभियान
धनबाद कोर्ट परिसर में भी बम की सूचना के बाद अफरा-तफरी की स्थिति बन सकती थी, लेकिन पुलिस की तत्परता से स्थिति नियंत्रण में रही. आरपीएफ की डॉग स्क्वॉड टीम को बुलाकर पूरे इलाके की गहन जांच की गई और हर संदिग्ध स्थान की जांच सुनिश्चित की गई. राहत की बात यह रही कि यहां भी कोई खतरनाक वस्तु नहीं मिली.
प्रशासन की सख्त चेतावनी और अपील
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके.
लगातार मिल रही बम धमकियों ने यह साफ कर दिया है कि यह केवल अफवाह या शरारत का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है. भले ही अब तक सभी धमकियां फर्जी साबित हुई हों, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरत रही हैं. अब जांच का फोकस इस बात पर है कि इन धमकियों के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है.

