बोकारो और बेगूसराय कोर्ट को धमकी, दो महीने में देशभर के अदालत परिसरों को 30 से ज्यादा बम ई-मेल
झारखंड के बोकारो सिविल कोर्ट और बिहार के बेगूसराय कोर्ट को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं. बोकारो में पुलिस ने कोर्ट परिसर खाली कराकर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते से तलाशी अभियान शुरू किया, जबकि बेगूसराय में भी धमकी भरे ई-मेल

झारखंड के बोकारो सिविल कोर्ट और बिहार के बेगूसराय कोर्ट को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं. बोकारो में पुलिस ने कोर्ट परिसर खाली कराकर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते से तलाशी अभियान शुरू किया, जबकि बेगूसराय में भी धमकी भरे ई-मेल के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई. हालांकि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है. जनवरी से मार्च 2026 के बीच देशभर में अदालतों और सरकारी संस्थानों को लगातार बम धमकी वाले ई-मेल मिल रहे हैं. बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के कोर्ट परिसरों को खाली कराना पड़ा. कई जगह कामकाज भी प्रभावित हुआ. जांच के बाद अधिकांश मामलों में धमकी फर्जी (hoax) निकली, लेकिन लगातार मिल रही इन धमकियों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर यह ई-मेल कौन भेज रहा है और क्यों अब तक जांच एजेंसियां इसके पीछे के नेटवर्क को पकड़ नहीं पाई हैं.
बिहार से शुरू हुआ सिलसिला, कई अदालतें बनीं निशाना
2026 की शुरुआत में ही बिहार के कई जिलों की अदालतों को एक साथ बम धमकी वाले ई-मेल मिले. जनवरी के अंत में मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, सीवान, भागलपुर और समस्तीपुर के सिविल कोर्ट को धमकी भेजी गई, जिसके बाद पुलिस ने परिसर खाली कराकर तलाशी अभियान चलाया. इसके बाद फरवरी में पटना, औरंगाबाद और भागलपुर के कोर्ट को भी धमकी भरे ई-मेल मिले. मेल में दावा किया गया था कि परिसर में RDX से भरे IED लगाए गए हैं. पुलिस ने कोर्ट परिसर खाली कराया और बम निरोधक दस्ते से जांच कराई, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला. लगातार मिल रही धमकियों के कारण कई बार अदालतों का कामकाज भी बाधित हुआ और मामलों की सुनवाई टालनी पड़ी.
देश के कई राज्यों में अदालतें और सरकारी संस्थान निशाने पर
बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी इसी तरह के ई-मेल से दहशत फैलाने की कोशिश हुई. हाल के दिनों में राजस्थान के नागौर और बीकानेर कोर्ट को धमकी मिलने के बाद परिसर खाली कराकर तलाशी अभियान चलाया गया. इसी तरह कर्नाटक के कलबुर्गी जिला अदालत में भी ई-मेल मिलने के बाद पुलिस ने कोर्ट खाली कराया और बम स्क्वॉड की मदद से कई घंटे तक तलाशी ली. बाद में यह धमकी भी फर्जी निकली. हरियाणा के पंचकूला जिला कोर्ट को भी इसी तरह के ई-मेल से धमकी दी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर को खाली कराकर जांच की. इन घटनाओं से साफ है कि धमकी देने वालों का निशाना सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि देशभर की अदालतें और सरकारी संस्थान बन रहे हैं.
कोर्ट के अलावा सरकारी संस्थान भी निशाने पर
पिछले कुछ दिनों में अदालतों के अलावा कई महत्वपूर्ण संस्थानों को भी धमकी मिली है. बेंगलुरु स्थित डीआरडीओ के गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) को ई-मेल में ड्रोन के जरिए IED लगाए जाने का दावा किया गया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर की तलाशी ली. कोलकाता के ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल को भी ई-मेल और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विस्फोट की धमकी मिली, जिसके बाद पुलिस ने परिसर खाली कराकर जांच की. चंडीगढ़ में पंजाब सचिवालय को भी इसी तरह के ई-मेल के बाद हाई अलर्ट पर रखा गया. इन घटनाओं से स्पष्ट है कि धमकी देने वालों का मकसद सिर्फ एक संस्थान नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर दहशत फैलाना हो सकता है.
दो महीनों में प्रमुख बम धमकी की घटनाएं
मार्च 2026
- 9 मार्च 2026 — बोकारो सिविल कोर्ट (झारखंड): ई-मेल के जरिए कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई. पुलिस ने कोर्ट परिसर खाली कराया और डॉग स्क्वॉड व बम निरोधक दस्ते से तलाशी अभियान चलाया.
- 9 मार्च 2026 — बेगूसराय सिविल कोर्ट (बिहार): धमकी भरे ई-मेल में ड्रोन और सायनाइड गैस से हमले का जिक्र किया गया. पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई और जांच शुरू की.
- 6 मार्च 2026 — रांची पासपोर्ट ऑफिस (झारखंड): रातू रोड स्थित पासपोर्ट कार्यालय को ई-मेल से बम धमाके की धमकी मिली. पुलिस और बम स्क्वॉड ने तलाशी ली, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला.
- 5 मार्च 2026 — DRDO का GTRE लैब, बेंगलुरु: ई-मेल में दावा किया गया कि ड्रोन से 14 IED लगाए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर की जांच की, धमकी फर्जी निकली.
- 5 मार्च 2026 — विक्टोरिया मेमोरियल, कोलकाता: ई-मेल और सोशल मीडिया पोस्ट में विस्फोट की धमकी दी गई. पुलिस ने परिसर खाली कराकर तलाशी ली.
- 4–5 मार्च 2026 — नागपुर जिला कोर्ट और पासपोर्ट ऑफिस (महाराष्ट्र): ई-मेल में सायनाइड टीम और विस्फोट की चेतावनी दी गई. पुलिस ने कई घंटे तलाशी अभियान चलाया.
- 6–7 मार्च 2026 — नागौर और बाड़मेर कोर्ट (राजस्थान): ई-मेल से धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर खाली कराए गए और तलाशी अभियान चलाया गया.
फरवरी 2026
- 26 फरवरी 2026 — पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (चंडीगढ़): कोर्ट के आधिकारिक ई-मेल पर बम धमाके की चेतावनी मिली. पुलिस ने परिसर खाली कराया और जांच की.
- 25 फरवरी 2026 — राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर): ई-मेल में कई धमाकों की चेतावनी दी गई. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे परिसर की तलाशी ली.
- 24 फरवरी 2026 — पश्चिम बंगाल के कई कोर्ट: कोलकाता, हुगली, मुर्शिदाबाद और आसनसोल समेत कई अदालतों को एक साथ धमकी भरे ई-मेल मिले.
- 16 फरवरी 2026 — नैनीताल जिला अदालत (उत्तराखंड): ई-मेल मिलने के बाद कोर्ट परिसर खाली कराया गया और बम निरोधक दस्ता बुलाया गया.
- 14 फरवरी 2026 — वाराणसी जिला कोर्ट (उत्तर प्रदेश): रात में भेजे गए धमकी भरे ई-मेल के बाद सुनवाई स्थगित कर दी गई और तलाशी अभियान चलाया गया.
- 13 फरवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के 19 जिलों के कोर्ट: लखनऊ समेत 19 जिलों की अदालतों को एक साथ धमकी वाले ई-मेल मिले.
- 6 फरवरी 2026 — रांची सिविल कोर्ट (झारखंड): ई-मेल से बम धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर खाली कराया गया और तलाशी अभियान चलाया गया.
- फरवरी 2026 — रांची समाहरणालय / डीसी ऑफिस: सिविल कोर्ट के बाद कलेक्टरेट को भी इसी तरह का धमकी भरा ई-मेल मिला और सुरक्षा बढ़ाई गई.
आखिर कौन भेज रहा है ये ई-मेल?
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन धमकी भरे ई-मेल का स्रोत पता लगाना है. कई मामलों में ई-मेल फर्जी आईडी, विदेशी सर्वर या VPN के जरिए भेजे गए पाए गए हैं. साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थायी ई-मेल सेवा, IP स्पूफिंग और VPN के कारण भेजने वाले का वास्तविक लोकेशन ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता है. कई मामलों में ई-मेल विदेशी IP से दिखाई देते हैं, जबकि भेजने वाला देश के भीतर भी हो सकता है. कुछ मामलों में जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं यह साइबर शरारत करने वाले संगठित समूह का काम तो नहीं, जो अलग-अलग राज्यों में एक ही पैटर्न से ई-मेल भेजकर प्रशासन को परेशान कर रहा है.
क्या जांच एजेंसियां पीछे रह गई हैं?
लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं. हर बार पुलिस को कोर्ट परिसर खाली कराना पड़ता है, बम स्क्वॉड बुलाना पड़ता है और घंटों तलाशी अभियान चलाना पड़ता है. अधिकांश मामलों में कुछ नहीं मिलता, लेकिन इस प्रक्रिया में अदालतों का कामकाज ठप हो जाता है और प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही इन धमकियों के पीछे के नेटवर्क को नहीं पकड़ा गया तो यह “डिजिटल बम धमकी” का नया ट्रेंड बन सकता है, जिसमें बिना विस्फोट के ही पूरे सिस्टम को बाधित किया जा सकता है.

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