यूरोप में क्यों पड़ रही है रिकॉर्डतोड़ गर्मी? पिघल रहीं सड़कें, टेढ़ी हो रहीं रेलवे लाइनें... वैज्ञानिकों ने बताई चौंकाने वाली वजह
यूरोप में रिकॉर्डतोड़ गर्मी से सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक टेढ़े हो रहे हैं और लोगों की मौत हो रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के बिना ऐसी हीटवेव लगभग असंभव थी.


यूरोप इस समय अपने हाल के वर्षों की सबसे भयंकर हीटवेव का सामना कर रहा है. फ्रांस, स्पेन, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है. हालात इतने गंभीर हैं कि सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक मुड़ रहे हैं, और इस तेज गर्मी के चलते लोगों की जानें भी जा रही हैं. जिन देशों में कभी एयर कंडीशनर की जरूरत नहीं महसूस होती थी, वहां अब लोग अपने घरों में कूलिंग सिस्टम लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं. इस बीच, वैज्ञानिकों ने इस असामान्य गर्मी के पीछे की एक बड़ी वजह बताई है.
50 साल पहले लगभग असंभव थी ऐसी गर्मी, आखिर क्या बदल गया?
यूरोप इस समय अपने हाल के वर्षों की सबसे भयंकर हीटवेव का सामना कर रहा है. फ्रांस, स्पेन, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है. हालात इतने गंभीर हैं कि सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक मुड़ रहे हैं, और इस तेज गर्मी के चलते लोगों की जानें भी जा रही हैं. जिन देशों में कभी एयर कंडीशनर की जरूरत नहीं महसूस होती थी, वहां अब लोग अपने घरों में कूलिंग सिस्टम लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं. इस बीच, वैज्ञानिकों ने इस असामान्य गर्मी के पीछे की एक बड़ी वजह बताई है.
सिर्फ तापमान नहीं, 'हीट डोम' और उमस भी बढ़ा रहे खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार यूरोप के कई हिस्से हीट डोम की चपेट में हैं. यह ऐसी मौसमीय स्थिति होती है जिसमें गर्म हवा एक क्षेत्र के ऊपर फंस जाती है और कई दिनों तक बाहर नहीं निकल पाती. इसके कारण दिन और रात दोनों समय तापमान असामान्य रूप से ऊंचा बना रहता है.
WWA के अध्ययन में 30 यूरोपीय देशों के 850 शहरों का विश्लेषण किया गया. इनमें से लगभग 45 प्रतिशत शहरों में हीट स्ट्रेस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. हीट स्ट्रेस केवल तापमान नहीं, बल्कि नमी और गर्मी के संयुक्त प्रभाव को दर्शाता है, जिससे शरीर के लिए खुद को ठंडा रखना बेहद मुश्किल हो जाता है.
अगर कार्बन उत्सर्जन नहीं रुका, तो भविष्य और डरावना होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में इस गर्मी का अनुभव सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग की एक गंभीर चेतावनी है. यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के जलवायु वैज्ञानिक माइकल मैन का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मौजूदा आकलनों से कहीं अधिक गंभीर हो सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर हम कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का उपयोग कम नहीं करते और कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं लगाते, तो भविष्य में ऐसी हीटवेवें और भी अधिक बार, लंबे समय तक और खतरनाक होती जाएंगी. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अब केवल उत्सर्जन को कम करना ही काफी नहीं होगा. हमें शहरों की योजना, घरों में कूलिंग सिस्टम, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन में भी बदलाव लाना होगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का असर अब दुनिया के सबसे विकसित देशों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है.

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