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Home»देश-विदेश»किस कानून से ताकतवर बना UGC? इक्विटी नियम पर बवाल के बीच UGC की संवैधानिक हैसियत पर बहस
देश-विदेश

किस कानून से ताकतवर बना UGC? इक्विटी नियम पर बवाल के बीच UGC की संवैधानिक हैसियत पर बहस

“UGC के नए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन को नियम बनाने की ताकत कहां से मिलती है. 1956 के कानून से लेकर NEP 2020 तक UGC की पूरी भूमिका पर नजर.”

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Satya MishraEditorial Desk
Published Jan 30, 2026 · 8:48 AM· 5 min read
किस कानून से ताकतवर बना UGC? इक्विटी नियम पर बवाल के बीच UGC की संवैधानिक हैसियत पर बहस

देश में उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाली सबसे ताकतवर संस्थाओं में शामिल यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. वजह है UGC का नया ‘इक्विटी रेगुलेशन’, जिस पर देशभर में विरोध हुआ और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फिलहाल रोक लगा दी. इस विवाद ने एक बुनियादी सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है—आखिर UGC को ऐसे नियम बनाने की शक्ति मिलती कहां से है, जिनके दम पर वह पूरे हायर एजुकेशन सिस्टम को कंट्रोल करता है? साथ ही, नई शिक्षा नीति 2020 और प्रस्तावित उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 के बाद यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या UGC अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है. जिस संस्था ने दशकों तक विश्वविद्यालयों के मानक तय किए, फंडिंग दी और नियम बनाए—क्या वह अब इतिहास बनने जा रही है? इन सभी सवालों के जवाब समझने के लिए जरूरी है कि UGC की संवैधानिक शक्तियों, उसके गठन, उसके इतिहास और भविष्य—तीनों को एक साथ देखा जाए.

UGC क्या है और उसका मुख्य काम क्या है?

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यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) एक वैधानिक संस्था है, जिसका काम देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को रेगुलेट करना है. इसमें विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित करना, उन्हें वित्तीय सहायता देना और शिक्षा की न्यूनतम गुणवत्ता सुनिश्चित करना शामिल है.

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UGC यह तय करता है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई, फैकल्टी, परीक्षा प्रणाली और इंफ्रास्ट्रक्चर के न्यूनतम मानक क्या होंगे. इसी वजह से UGC के बनाए नियम पूरे देश के हायर एजुकेशन सिस्टम को सीधे प्रभावित करते हैं.

UGC को नियम बनाने की शक्ति कहां से मिलती है?

UGC की ताकत का असली स्रोत यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 है. इसी कानून में UGC की शक्तियां, दायित्व और अधिकार स्पष्ट रूप से दर्ज हैं.

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तीन अहम सेक्शन जो UGC को ताकत देते हैं

1. सेक्शन 12 – Powers and Functions of Commission

यह सेक्शन UGC के कार्य और अधिकार तय करता है. इसके तहत UGC विश्वविद्यालयों के स्टैंडर्ड तय कर सकता है, निरीक्षण कर सकता है और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है.

2. सेक्शन 25 – Rules Making Power

इस सेक्शन के तहत केंद्र सरकार को UGC से जुड़े नियम बनाने का अधिकार मिलता है. जैसे—चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति, सेवा शर्तें और रिटायरमेंट से जुड़े नियम.

3. सेक्शन 26 – Regulation Making Power

यही वह सेक्शन है, जिसके तहत UGC खुद रेगुलेशन बनाता है. नए कोर्स, फैकल्टी योग्यता, प्रमोशन, समानता (Equity) जैसे नियम इसी धारा के तहत बनाए जाते हैं.

विवादों में रहा नया UGC इक्विटी रेगुलेशन भी सेक्शन 12 और सेक्शन 26 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर बनाया गया था.

नए इक्विटी नियम पर क्यों मचा बवाल?

UGC का नया इक्विटी रेगुलेशन 13 जनवरी से लागू हुआ था. इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता का माहौल बनाना बताया गया. हालांकि, इसके कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस रेगुलेशन पर फिलहाल रोक लगा दी और नए सिरे से नियम बनाने का निर्देश दिया. जब तक नए नियम नहीं आते, तब तक UGC इक्विटी रेगुलेशन 2012 लागू रहेगा.

सर जॉन सार्जेंट कमेटी से शुरुआत, 1947 में बढ़ा दायरा

आम धारणा है कि UGC की स्थापना 1956 में हुई, लेकिन हकीकत यह है कि इसकी जड़ें इससे करीब एक दशक पहले तक जाती हैं. 1944 में ब्रिटिश शिक्षाविद् सर जॉन सार्जेंट की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी, जिसने भारत में उच्च और वयस्क शिक्षा को लेकर अहम सिफारिशें कीं. इसी रिपोर्ट के आधार पर 1945 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमेटी का गठन किया गया. शुरुआत में यह कमेटी सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की निगरानी करती थी. लेकिन 1947 तक इसका दायरा देश की सभी यूनिवर्सिटीज तक फैल गया.

आजादी के बाद UGC का औपचारिक गठन

1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में यूनिवर्सिटी एजुकेशन कमीशन बनाया गया.

1952 में केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों को फंड देने के लिए UGC को नामित किया.

1953 में मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया और

1956 में UGC अधिनियम के जरिए इसे वैधानिक दर्जा मिला.

NEP 2020 और UGC का भविष्य

नई शिक्षा नीति 2020 को भारत के शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है. इसी नीति के तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नए ढांचे में ढालने की तैयारी है.

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 संसद में पेश किया है. इस बिल के कानून बनने के बाद—

• UGC, AICTE और NCTE जैसी संस्थाएं खत्म हो सकती हैं

• उनकी जगह एक सिंगल आयोग के तहत अलग-अलग परिषद काम करेंगी

• रेगुलेटरी काउंसिल नई व्यवस्था लागू करेगी

क्या UGC इतिहास बनने जा रहा है?

अगर नया बिल कानून बनता है, तो दशकों तक देश की उच्च शिक्षा को दिशा देने वाला UGC इतिहास का हिस्सा बन जाएगा. हालांकि, जब तक नया ढांचा लागू नहीं होता, तब तक UGC अपने मौजूदा अधिकारों के तहत नियम और रेगुलेशन बनाता रहेगा. UGC को मिली ताकत किसी एक आदेश से नहीं, बल्कि UGC एक्ट 1956 के मजबूत कानूनी ढांचे से आती है. आज जब उसके नियमों पर सवाल उठ रहे हैं और उसका भविष्य बदलने की तैयारी हो रही है, तब यह समझना जरूरी है कि UGC सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि भारत के उच्च शिक्षा इतिहास का एक अहम अध्याय है.

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