“जहाज आया तो आग लगा देंगे” ईरान की चेतावनी, होर्मुज पर हाई टेंशन; 10 प्वाइंट में पूरी खबर
मिडिल ईस्ट में जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान ने अपनी समुद्री सीमा से लगे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दुनिया को सीधी चेतावनी दे दी है—अगर कोई जहाज गुजरा तो उसे निशाना बनाया जाएगा.

मिडिल ईस्ट में जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ईरान ने अपनी समुद्री सीमा से लगे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दुनिया को सीधी चेतावनी दे दी है—अगर कोई जहाज गुजरा तो उसे निशाना बनाया जाएगा. यह वही समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया की रोज़ाना तेल खपत का लगभग 20% गुजरता है. ऐसे में इस घोषणा ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है. कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है और आशंका जताई जा रही है कि अगर तनाव लंबा चला तो कीमतें 100 डॉलर तक जा सकती हैं. इस पूरे घटनाक्रम के पीछे इजराइल और अमेरिका के साथ चल रही जंग, हमले, जवाबी कार्रवाई और कूटनीतिक विफलताएं जुड़ी हैं. आइए पूरे घटनाक्रम को 10 प्वाइंट में समझते हैं.
1. होर्मुज को बंद करने का ऐलान और ईरानी चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सरकारी टीवी पर कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बंद है. यदि कोई जहाज गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे रोका जाएगा और जरूरत पड़ी तो आग के हवाले कर दिया जाएगा. इससे पहले भी ईरान ने सैन्य अभ्यास के दौरान अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इस बार बयान पहले से ज्यादा सख्त है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद यह फैसला लिया गया. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में पहले से ड्रोन और मिसाइल हमलों का सिलसिला जारी है. ईरान का दावा है कि यह कदम उसकी सुरक्षा के लिए है, जबकि पश्चिमी देश इसे वैश्विक व्यापार के लिए खतरा बता रहे हैं.
2. क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात मार्ग है. यह खाड़ी देशों—सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, यूएई और ईरान—को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसकी सबसे संकरी चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर है, जबकि नौवहन चैनल कुछ जगहों पर केवल 3 किलोमीटर चौड़ा है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, यहां से निकलने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एशिया जाता है. चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया इसके प्रमुख खरीदार हैं. यदि यह मार्ग अवरुद्ध होता है, तो न केवल तेल बल्कि LNG और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति भी प्रभावित होगी. वैकल्पिक पाइपलाइन सीमित क्षमता रखती हैं, इसलिए लंबी बंदी वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे सकती है.
3. तेल बाजार में उछाल और महंगाई की आशंका
ईरान की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई. विश्लेषकों का मानना है कि अगर होर्मुज पूरी तरह बाधित हुआ तो कीमतें 100 डॉलर के करीब पहुंच सकती हैं. फरवरी में अस्थायी प्रतिबंध के दौरान ही कीमतों में 6% उछाल देखा गया था. ऊर्जा की बढ़ती कीमतें सीधे परिवहन, खाद्य और विनिर्माण लागत पर असर डालती हैं. इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है. विकासशील देशों पर इसका असर ज्यादा होगा, जहां ईंधन सब्सिडी और चालू खाते का दबाव बढ़ सकता है. वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता देखी जा रही है और निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं.
4. भारत पर संभावित प्रभाव
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. अनुमान है कि करीब आधा तेल होर्मुज मार्ग से गुजरता है. यदि आपूर्ति बाधित होती है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इससे परिवहन लागत और खाद्य महंगाई पर असर पड़ेगा. चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और रुपया दबाव में आ सकता है. साथ ही खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में 90 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा और रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है. सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
5. जंग का विस्तार: ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल
यह संकट 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद तेज हुआ. ईरान में शीर्ष नेतृत्व पर हमले हुए और सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें सामने आईं. मानवाधिकार समूहों के अनुसार मृतकों का आंकड़ा 700 से ज्यादा हो चुका है, जिनमें कई बच्चे शामिल हैं. ईरान ने जवाब में बहरीन, कुवैत, इराक और यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल दागे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार हैं और जरूरत पड़ी तो जवाब दिया जाएगा. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका लंबी जंग में नहीं फंसेगा, लेकिन परमाणु खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा.
6. खाड़ी देशों और दूतावासों पर हमले
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले की खबर आई, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ. कुवैत ने दावा किया कि उसने 178 बैलिस्टिक मिसाइल और 384 ड्रोन को नाकाम किया. बहरीन और इराक में भी हमलों की पुष्टि हुई है. कई देशों ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने की सलाह दी है. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने यूएई से निकलने की चेतावनी दी, जबकि अमेरिका ने बहरीन, कुवैत, इराक, सऊदी अरब और यूएई सहित कई देशों में गैर-जरूरी स्टाफ हटाया. एयरलाइंस ने उड़ानें डायवर्ट या रद्द कर दीं, जिससे क्षेत्रीय हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ.
7. लेबनान और हिज्बुल्लाह मोर्चा
संघर्ष का असर लेबनान तक फैल गया है. इजराइल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. बेरूत में अल-मनार टीवी स्टेशन को निशाना बनाया गया, जो हिज्बुल्लाह से जुड़ा है. हिज्बुल्लाह ने इजराइल के एयरबेस पर ड्रोन हमले का दावा किया. इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को खाली करने का आदेश दिया है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं. इस मोर्चे के खुलने से संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और ज्यादा अस्थिर हो सकती है.
8. कूटनीतिक मोर्चा और विफल वार्ताएं
अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान को परमाणु ईंधन देने और 10 साल तक यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बातचीत विफल रही. ईरान ने कहा कि वह अब अमेरिका से कोई वार्ता नहीं करेगा. चीन ने स्पष्ट किया कि उसने ईरान को सैन्य मदद नहीं दी, केवल राजनीतिक समर्थन है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने स्कूलों और नागरिक ठिकानों पर हमलों की निंदा की. कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठप हैं और दोनों पक्ष सैन्य तैयारी बढ़ा रहे हैं. इससे आशंका है कि तनाव जल्दी कम नहीं होगा.
9. वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा
होर्मुज के अलावा लाल सागर और अदन की खाड़ी में पहले से हूती विद्रोहियों के हमले जारी थे. अब दो प्रमुख समुद्री मार्ग जोखिम में हैं. यदि बीमा प्रीमियम बढ़ता है और जहाज वैकल्पिक लंबा मार्ग अपनाते हैं, तो शिपिंग लागत कई गुना बढ़ सकती है. इससे न केवल तेल बल्कि कंटेनर व्यापार भी प्रभावित होगा. वैश्विक सप्लाई चेन पहले ही महामारी और युद्धों से जूझ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई देश अपने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर पुनर्विचार करेंगे.
10. आगे क्या? संभावित परिदृश्य
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या होर्मुज वास्तव में पूरी तरह बंद होगा या यह दबाव बनाने की रणनीति है? अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, जबकि ईरान इसे बंद बताता है. यदि सैन्य टकराव बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में उथल-पुथल तय है. यदि कूटनीतिक पहल दोबारा शुरू होती है तो तनाव कम हो सकता है. फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक है. तेल बाजार, शेयर बाजार और कूटनीतिक हलचलें संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिन निर्णायक होंगे. दुनिया की नजरें अब मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यहां की हर हलचल सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है.

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