विक्रमशिला सेतु बंद, स्टीमर के सहारे भागलपुर-नौगछिया की आवाजाही; घंटों इंतजार को मजबूर लोग
विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने के बाद भागलपुर और नौगछिया के बीच लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. रोजमर्रा के काम, इलाज, कारोबार और जरूरी सामान के लिए लोग अब जानवी घाट से स्टीमर के जरिए नदी पार कर रहे हैं.

भागलपुर:-विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बाधित होने के बाद भागलपुर और नौगछिया के बीच लोगों की परेशानी बढ़ गई है. रोजमर्रा के काम, कारोबार, खेती-किसानी, इलाज और जरूरी सामान के लिए लोगों को अब वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. भागलपुर के जानवी घाट से स्टीमर के जरिए लोगों को नदी पार कराया जा रहा है. घाट पर यात्रियों की भीड़ और स्टीमर पकड़ने के लिए जल्दबाजी करते लोगों की तस्वीरें व्यवस्था की चुनौती को दिखा रही हैं. कई लोग साइकिल और मोटरसाइकिल लेकर घाट तक पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को अपनी गाड़ियां दूसरी जगह पार्क कर नदी पार करनी पड़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के जरिए पहले कम समय में सफर पूरा हो जाता था, लेकिन अब यात्रा में काफी समय लग रहा है. दवा और इलाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ रहा है. लोगों की मांग है कि पुल का काम जल्द पूरा कर सामान्य आवागमन बहाल किया जाए.
स्टीमर से नदी पार करने को मजबूर यात्री
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर से नौगछिया जाने वाले यात्रियों के लिए स्टीमर अहम साधन बन गया है. घाट पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. स्टीमर भरने के बाद ही उसके रवाना होने की व्यवस्था होने के कारण यात्रियों को इंतजार भी करना पड़ रहा है. कई लोग स्टीमर छूटने के डर से घाट पर दौड़ते हुए पहुंचते दिखाई दिए.
इलाज और दवा के लिए बढ़ा सफर का समय
स्थानीय लोगों ने बताया कि दवा और इलाज जैसे जरूरी काम के लिए भी अब अतिरिक्त समय लग रहा है. एक व्यक्ति ने बताया कि पहले आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचने में करीब एक घंटे का समय लगता था, लेकिन पुल बंद होने के बाद दवा लेने जैसे काम में पूरा दिन निकल जा रहा है. लोगों का कहना है कि रात के समय किसी आपात स्थिति में वैकल्पिक आवागमन और मुश्किल हो सकता है.
छोटे कारोबार और रोज कमाने वालों पर असर
पुल बंद होने का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है. एक व्यक्ति ने बताया कि वह केला लेकर नौगछिया जाता है और बिक्री के बाद वापस लौटता है. उसके मुताबिक पहले रोजाना करीब 500 से 600 रुपये तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन अब आने-जाने में ज्यादा समय लग रहा है. व्यापारियों और कामगारों का कहना है कि अतिरिक्त समय और यात्रा की परेशानी का सीधा असर उनके काम पर पड़ रहा है.
बाइक लेकर जाने वालों की अलग परेशानी
स्टीमर से आवाजाही के दौरान मोटरसाइकिल लेकर जाने वाले लोगों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ यात्रियों ने बताया कि उन्हें बाइक दूसरी जगह पार्क करके आगे जाना पड़ रहा है. पार्किंग के लिए रोजाना अतिरिक्त राशि देने की बात भी लोगों ने कही. वहीं, नदी पार करने के रास्ते और पानी की स्थिति को लेकर भी यात्रियों ने परेशानी बताई.
लोगों की मांग-जल्द बहाल हो पुल से आवागमन
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने स्टीमर की व्यवस्था कर तत्काल आवागमन का विकल्प जरूर दिया है, लेकिन इससे पुल के जरिए होने वाली आसान और तेज आवाजाही की भरपाई नहीं हो पा रही है. लोगों ने पुल का काम जल्द पूरा करने की मांग की है. कुछ लोगों का कहना है कि छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से पहले पुल बंद होने से कारोबार और आम लोगों की आवाजाही पर अतिरिक्त असर पड़ रहा है. लोगों की उम्मीद है कि जल्द स्थायी समाधान निकले और भागलपुर-नौगछिया के बीच सामान्य यातायात बहाल हो.

