US-Israel Iran War Live: 7वें दिन भी नहीं थमी जंग, ईरान के मिसाइल लॉन्चर तबाह, ‘लंबी लड़ाई’ की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार खतरनाक होते जा रहे हैं. संयुक्त सैन्य अभियान के तहत अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ सैन्य संघर्ष अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार खतरनाक होते जा रहे हैं. संयुक्त सैन्य अभियान के तहत अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं. दूसरी ओर ईरान भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों, इजरायल और सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर रहा है. इजरायल का दावा है कि अब तक ईरान के बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए जा चुके हैं, जबकि ईरान का कहना है कि वह “लंबी जंग” के लिए तैयार है. इस संघर्ष का असर पूरे मध्य-पूर्व में दिखाई दे रहा है — कई देशों में आपात सुरक्षा अलर्ट जारी हैं, तेल और शिपिंग बाजार प्रभावित हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा दिखाई दे रहा है.
ईरान में हजारों सैन्य ठिकानों पर हमले
अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त हवाई अभियान जारी रखा है. रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने अब तक ईरान में हजारों सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें मिसाइल बेस, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड सेंटर शामिल हैं. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढांचे को कमजोर करना है ताकि भविष्य में बड़े हमलों की संभावना कम हो सके. इजरायली सेना का दावा है कि कई अहम सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है और ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है.
मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान
इजरायली सेना के अनुसार लगातार हवाई हमलों में ईरान के बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल का दावा है कि अब तक ईरान के लगभग 60 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर और 80 प्रतिशत एयर डिफेंस सिस्टम क्षतिग्रस्त या नष्ट किए जा चुके हैं. हालांकि इजरायल का यह भी कहना है कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है क्योंकि ईरान अभी भी मिसाइल हमले करने की क्षमता रखता है.
खाड़ी देशों तक फैला संघर्ष
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने कुवैत, कतर, सऊदी अरब और बहरीन की दिशा में भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इन हमलों को कई देशों ने इंटरसेप्ट किया, लेकिन इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ गया है.
लेबनान और हिजबुल्लाह की एंट्री से बढ़ा खतरा
संघर्ष अब सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा. ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं. इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत और दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर हिजबुल्लाह पूरी तरह युद्ध में उतरता है तो यह संघर्ष और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है.
ईरानी जहाज डूबने की खबर
युद्ध अब समुद्री क्षेत्र तक भी पहुंच गया है. रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया. बताया जा रहा है कि इस हमले में कई नौसैनिक मारे गए. इसके अलावा अमेरिकी सेना ने ईरानी नौसेना के कई जहाजों और सैन्य उपकरणों को भी नष्ट करने का दावा किया है. यह घटनाक्रम इस संघर्ष को और खतरनाक बना सकता है.
तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर
इस युद्ध का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है. कुछ बड़ी शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से मध्य-पूर्व से गुजरने वाली सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है.
नागरिकों की मौतें और मानवीय संकट
इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान और इजरायल में भी कई लोग मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों ने चिंता जताई है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो नागरिकों के लिए स्थिति और खराब हो सकती है.
क्या लंबी जंग की ओर बढ़ रहा है मिडिल ईस्ट?
अमेरिका और इजरायल दोनों ने संकेत दिए हैं कि सैन्य अभियान अभी जारी रहेगा और आगे भी बड़े हमले हो सकते हैं. दूसरी ओर ईरान का कहना है कि वह इस युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक संघर्ष करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक समाधान जल्द नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है.

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