घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ. पिछले तीन दिनों में बीएसई सेंसेक्स 1,100 अंकों से अधिक टूट चुका है, जबकि निफ्टी 50 में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई है. बड़े शेयरों में बिकवाली, बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताएं और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया है.
इस हफ्ते अब तक बाजार में कोई ठोस रिकवरी देखने को नहीं मिली है और गिरावट पहले के मुकाबले ज्यादा व्यापक होती नजर आ रही है. बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारण इस प्रकार हैं—
बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव
इंडेक्स के हैवीवेट शेयरों में लगातार बिकवाली बाजार को नीचे खींच रही है. बुधवार को एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.7% और रिलायंस इंडस्ट्रीज 0.4% टूट गया. वहीं ट्रेंट के शेयर में 1.4% की गिरावट दर्ज की गई. इससे पहले के सत्र में ट्रेंट में 8.6% और रिलायंस में करीब 5% की तेज गिरावट देखी गई थी. इन बड़े शेयरों में कमजोरी का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा.
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार में फिलहाल कोई स्पष्ट ट्रेंड नहीं दिख रहा है. कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों की हलचल पूरे बाजार को प्रभावित कर रही है. उन्होंने कहा कि मंगलवार को संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बावजूद निफ्टी गिरा, जिसका मुख्य कारण रिलायंस और एचडीएफसी बैंक में भारी बिकवाली थी. यह गतिविधि सेटलमेंट डे से जुड़ी हो सकती है.
वेनेजुएला में राजनीतिक संकट
वेनेजुएला में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और वहां के पेट्रोलियम संसाधनों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है. 3 जनवरी को अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी की खबरों ने भू-राजनीतिक जोखिम को और बढ़ा दिया.
डॉ. विजयकुमार ने कहा कि आगे चलकर खबरों और घटनाक्रमों के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी राजनीति से जुड़े फैसले और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर आने वाला कोर्ट का फैसला बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
एशियाई बाजारों से कमजोर संकेत
भारतीय बाजारों पर एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी असर देखने को मिला. वेनेजुएला संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के चलते एशिया के कई प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. जापान के शेयर बाजारों में कमजोरी ने पूरे क्षेत्रीय बाजार को दबाव में डाल दिया.
इसके अलावा, चीन द्वारा जापान को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई. यह कदम जापान के प्रधानमंत्री की ताइवान को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद उठाया गया है.
कंसॉलिडेशन और बढ़ता उतार-चढ़ाव
तकनीकी संकेत बताते हैं कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि की बड़ी कमजोरी नहीं, बल्कि कंसॉलिडेशन या सुधार का हिस्सा हो सकती है. हालांकि, निकट भविष्य में अस्थिरता का जोखिम बना रहेगा.
Emkay Global के हेड–बिजनेस डेवलपमेंट–इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जयकृष्ण गांधी के अनुसार, 1991 के बाद से निफ्टी में सात बड़े तेजी के चक्र देखे गए हैं, जो आमतौर पर 40 से 55 महीनों तक चले हैं. इसके बाद कंसॉलिडेशन का दौर आया है. उन्होंने कहा कि हालिया कंसॉलिडेशन अवधि पूरी होने के बाद बाजार में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है.
गांधी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 25,500–25,300 का स्तर मजबूत सपोर्ट है, जबकि ऊपर की ओर 28,500 तक जाने की संभावना बनी हुई है. सेक्टर के स्तर पर उन्होंने फार्मा शेयरों में मजबूती के संकेत दिए हैं.

