दुपट्टा खींचने के आरोप वाला मामला जारी रहेगा, विधायक भूषण बाड़ा समेत 5 आरोपियों को झटका
“झारखंड हाईकोर्ट ने महिला उत्पीड़न और मारपीट से जुड़े एक पुराने मामले में सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा समेत पांच आरोपियों को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने केस खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी और साफ कहा कि मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी.”

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने महिला उत्पीड़न और मारपीट से जुड़े एक पुराने मामले में सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा समेत पांच आरोपियों को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने केस खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी और साफ कहा कि मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी. इस फैसले के बाद अब MP/MLA कोर्ट में ट्रायल आगे बढ़ेगा. हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जसिंता मिन्ज, समीर मिन्ज, एमा बाड़ा, जोसिमा जक्षा और विधायक भूषण बाड़ा ने शिकायत केस को रद्द करने की मांग की थी. लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया.
क्या है 8 साल पुराना मामला?
पूरा मामला साल 2018 का है. शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वह अपनी दोस्त सोनी मिन्ज की शादी की जानकारी उसके परिजनों को देने गांव गई थी. इसी दौरान गांव में मौजूद लोगों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया. महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथ मारपीट की गई, अपमानित किया गया और यहां तक कि दुपट्टा खींचकर बदसलूकी भी की गई. इसके बाद शिकायत दर्ज हुई और मामला आगे चलकर MP/MLA कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया.
हाईकोर्ट ने क्यों नहीं खत्म किया केस?
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि इससे जुड़े एक पुलिस केस को पहले हाईकोर्ट रद्द कर चुका है, इसलिए शिकायत केस भी खत्म होना चाहिए. लेकिन जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने यह तर्क नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि शिकायत केस पहले दर्ज हुआ था, जबकि पुलिस केस बाद में आया. ऐसे में बाद वाले केस के खत्म होने का असर पहले से चल रहे मामले पर नहीं पड़ता. कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों मामलों के आरोप पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं, इसलिए शिकायत केस को खत्म करने का आधार नहीं बनता.
महिला का दुपट्टा खींचने के आरोप पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि महिला के साथ अभद्र व्यवहार और दुपट्टा खींचने की बात प्रथम दृष्टया (prima facie) सामने आती है. इसी आधार पर अदालत ने कहा कि IPC की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने या छेड़छाड़ से जुड़ी धारा) जोड़ना सही था. ट्रायल कोर्ट ने अतिरिक्त धारा जोड़ने में कोई गलती नहीं की.
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट की ओर से याचिका खारिज होने के बाद अब मामला बंद नहीं होगा. MP/MLA कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी और ट्रायल आगे बढ़ेगा. विधायक भूषण बाड़ा समेत बाकी आरोपियों को अब कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा.

