RSS कार्यालय पर हमला सिर्फ पेट्रोल बम नहीं था! NIA जांच में सामने आई पाकिस्तान-दुबई कनेक्शन वाली आतंकी साजिश
रांची स्थित RSS कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में NIA को बड़े सुराग मिले हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पाकिस्तान और दुबई से जुड़े कथित विदेशी हैंडलरों के संपर्क, ऑनलाइन ट्रेनिंग और सुनियोजित साजिश के संकेत सामने आए हैं.

Ranchi: रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. शुरुआती दौर में इसे केवल आगजनी या शरारती वारदात माना जा रहा था, लेकिन अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जोड़ रही है. एजेंसी की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने पाकिस्तान और दुबई में बैठे कथित हैंडलरों से संपर्क की बात स्वीकार की है. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को ऑनलाइन पेट्रोल बम बनाने और हमला करने की ट्रेनिंग दी गई थी. इन खुलासों के बाद यह मामला केवल रांची तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार से संचालित आतंकी मॉड्यूल के संभावित नेटवर्क की जांच का विषय बन गया है.
शुरुआत में आगजनी का मामला लगा, जांच बढ़ी तो खुलने लगीं नई परतें
17 जून की देर रात रांची के निवारणपुर स्थित RSS कार्यालय पर दो लोगों ने कथित तौर पर पेट्रोल बम फेंके थे. घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी, जिसके बाद झारखंड पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. शुरुआती जांच में घटनास्थल से पेट्रोल से भरी बोतलें और अन्य सामग्री बरामद हुई. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच NIA को सौंप दी गई.
NIA पूछताछ में पाकिस्तान-दुबई कनेक्शन की जांच तेज
NIA की रिमांड के दौरान गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी और सयाम सुजान से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों किन विदेशी संपर्कों के जरिए सक्रिय थे और उन्हें किस तरह निर्देश मिल रहे थे. जांच में सामने आया है कि आरोपी इंटरनेट आधारित मैसेजिंग और वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए विदेश में मौजूद कथित हैंडलरों के संपर्क में थे. एजेंसी इस संभावना की भी जांच कर रही है कि इनका संबंध ऐसे आतंकी मॉड्यूल से हो सकता है, जो भारत में संवेदनशील संस्थानों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे. फिलहाल इन सभी पहलुओं की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है.
ऑनलाइन ट्रेनिंग, डिजिटल चैट और विदेश यात्रा की भी पड़ताल
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों को कथित तौर पर ऑनलाइन माध्यम से पेट्रोल बम तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने के तरीके बताए गए. अब NIA यह भी खंगाल रही है कि दोनों आरोपी दुबई कैसे पहुंचे, वहां किन लोगों से मिले और उनकी यात्रा का खर्च किसने उठाया. एजेंसी मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, सोशल मीडिया गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की विस्तृत जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि यदि डिजिटल ट्रेल पूरी तरह स्थापित हो जाती है तो इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं. फिलहाल एजेंसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर तकनीकी साक्ष्य का सत्यापन कर रही है.
आतंकी नेटवर्क की बड़ी तस्वीर तलाश रही है NIA
जांच एजेंसियों का फोकस अब केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं है. NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह हमला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या फिर स्थानीय स्तर पर विदेशी निर्देशों के आधार पर अंजाम दिया गया. एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह के मॉड्यूल सक्रिय हैं. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में विदेशी आतंकी नेटवर्क से जुड़े ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकता है. फिलहाल NIA की जांच जारी है और एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं.

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