रोजमार्टा कंपनी पर मेहरबानी क्यों? बाबूलाल मरांडी ने परिवहन विभाग में करोड़ों के भुगतान पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी का दावा है कि ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड प्रिंटिंग का काम करने वाली रोजमार्टा कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बावजूद उसे बिना वैध एग्रीमेंट के काम कराया जा रहा है और करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया गया. मरांडी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और सरकार से जवाब की मांग की है.

Ranchi : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार और सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने परिवहन विभाग में कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. उनका दावा है कि ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड की प्रिंटिंग का काम करने वाली गुरुग्राम की रोजमार्टा कंपनी का अनुबंध मार्च 2026 में समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी बिना वैध एग्रीमेंट के काम कर रही है और उसे करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया जा रहा है. मरांडी ने सवाल उठाया है कि आखिर किस नियम के तहत यह भुगतान हो रहा है और क्या सरकार किसी खास कंपनी को नियमों से ऊपर रखकर संरक्षण दे रही है.
अनुबंध खत्म, फिर भी कंपनी को मिला काम?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी कार्ड की प्रिंटिंग का काम संभाल रही रोजमार्टा कंपनी के साथ राज्य सरकार का अनुबंध 22 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया था. इसके बाद केवल 22 मार्च तक सीमित अवधि का विस्तार दिया गया. मरांडी का आरोप है कि एक्सटेंशन खत्म होने के बाद भी कंपनी पिछले करीब तीन महीने से बिना किसी वैध अनुबंध के काम कर रही है. इतना ही नहीं, इस अवधि में कंपनी को विभाग की ओर से करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया गया.
सरकार से पूछे कई सीधे सवाल
बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले में सरकार और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा कि यदि किसी कंपनी का अनुबंध समाप्त हो चुका था तो फिर किस नियम के तहत उसे सरकारी काम जारी रखने की अनुमति दी गई. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि भुगतान की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी, क्या वित्त विभाग को इसकी जानकारी थी और क्या इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी या कैबिनेट की मंजूरी ली गई थी. मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि किसी सामान्य ठेकेदार का अनुबंध समाप्त हो जाए तो क्या उसे भी बिना एग्रीमेंट के सरकारी काम करने दिया जाएगा, या यह विशेष छूट केवल एक कंपनी को दी गई.
ट्रेजरी स्कैम का भी किया जिक्र
नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को हाल के चर्चित ट्रेजरी स्कैम और फर्जी बैंक गारंटी प्रकरण से भी जोड़ते हुए कहा कि उन मामलों में भी सरकार अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई है. उनका आरोप है कि राज्य में अलग-अलग विभागों से लगातार वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. मरांडी ने कहा कि अगर आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि रोजमार्टा कंपनी को विशेष संरक्षण क्यों मिला और बिना वैध अनुबंध के करोड़ों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया. साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि अनियमितता सामने आती है तो केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.





Leave a comment