Tamil Nadu Government Formation: VCK के समर्थन से खत्म हुआ सस्पेंस, अब विजय बनेंगे तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अभिनेता विजय की पार्टी TVK को VCK, कांग्रेस, CPI और CPI(M) का समर्थन मिलने के बाद बहुमत हासिल हो गया है. 119 सीटों के साथ विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है.


तमिलनाडु में कई दिनों से चल रहे राजनीतिक सस्पेंस पर आखिरकार शुक्रवार को विराम लग गया. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK यानी तमिलगा वेत्री कड़गम को सरकार गठन के लिए जरूरी बहुमत मिल गया है. VCK यानी विदुथलाई चिरुथैगल काची ने बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस, CPI, CPI(M) और VCK के समर्थन से TVK का आंकड़ा 119 सीटों तक पहुंच गया. 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है. समर्थन मिलने के बाद अब विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है. तमिलनाडु की राजनीति में यह सिर्फ सरकार गठन नहीं, बल्कि दशकों पुरानी DMK-AIADMK केंद्रित राजनीति के टूटने का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है.
VCK के समर्थन से बदला पूरा राजनीतिक समीकरण
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी को चौंका दिया था. हालांकि बहुमत से 10 सीट दूर रहने की वजह से सरकार गठन पर सस्पेंस बना हुआ था. पहले कांग्रेस ने समर्थन दिया, फिर CPI और CPI(M) साथ आए. लेकिन असली गेम VCK के समर्थन के बाद बदल गया. TVK नेता अधव अर्जुन ने मीडिया के सामने VCK का समर्थन पत्र दिखाते हुए सिर्फ एक शब्द कहा— “विजय.” इसके बाद पार्टी मुख्यालय के बाहर जश्न शुरू हो गया. सूत्रों के मुताबिक विजय जल्द ही राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.
DMK की पुरानी सहयोगी पार्टी ने क्यों बदला रुख?
VCK लंबे समय से DMK गठबंधन की अहम सहयोगी मानी जाती रही है. दलित राजनीति और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उसकी मजबूत पकड़ है. ऐसे में VCK का TVK के साथ जाना तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि VCK ने यह समझ लिया कि इस चुनाव में जनता बदलाव के मूड में थी और विजय तेजी से नए राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरे हैं. यही वजह है कि पार्टी ने विपक्ष में बैठने की बजाय सत्ता के नए समीकरण के साथ जाने का फैसला किया. हालांकि CPI और CPI(M) ने साफ कर दिया है कि वे सरकार में शामिल नहीं होंगे, बल्कि बाहर से समर्थन देंगे. यानी विजय सरकार को हर बड़े फैसले पर सहयोगियों का राजनीतिक संतुलन साधना पड़ेगा.
आखिर विजय की राजनीति इतनी तेजी से क्यों चली?
तमिलनाडु में लंबे समय से राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लेकिन इस चुनाव में विजय ने “नई राजनीति”, भ्रष्टाचार विरोधी छवि और युवा नेतृत्व के नैरेटिव के जरिए खुद को अलग तरीके से पेश किया. विशेषज्ञों के मुताबिक विजय को सबसे ज्यादा फायदा युवाओं, पहली बार वोट देने वालों और शहरी मध्यवर्ग से मिला. सोशल मीडिया कैंपेन, फिल्मों वाली लोकप्रियता और आक्रामक प्रचार ने TVK को तेजी से मजबूत किया. सबसे अहम बात यह रही कि DMK विरोधी वोट इस बार AIADMK के बजाय TVK की तरफ शिफ्ट होता दिखा.
सरकार बनने के बाद विजय के सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां?
हालांकि विजय सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच चुके हैं, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी. TVK के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और सहयोगी दल बाहर से समर्थन दे रहे हैं. यानी सरकार की स्थिरता पूरी तरह राजनीतिक तालमेल पर निर्भर करेगी.
दूसरी तरफ DMK विपक्ष में बैठकर आक्रामक भूमिका निभा सकती है. वहीं AIADMK भी खुद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश करेगी. इसके अलावा सरकार गठन के बीच TTV दिनाकरन ने TVK पर “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाकर नया विवाद भी खड़ा कर दिया है. फिलहाल इतना साफ है कि विजय अब सिर्फ फिल्मी “थलपति” नहीं रहे… बल्कि तमिलनाडु की असली सत्ता तक पहुंच चुके हैं.

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