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Home»देश-विदेश»Supreme Court का ऐतिहासिक आदेश: स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग टॉयलेट अनिवार्य
देश-विदेश

Supreme Court का ऐतिहासिक आदेश: स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग टॉयलेट अनिवार्य

“सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी स्कूलों के लिए ऐतिहासिक आदेश जारी किया है. अब कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.”

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Satya MishraEditorial Desk
Published Jan 30, 2026 · 10:40 AM· 4 min read
Supreme Court का ऐतिहासिक आदेश: स्कूलों में लड़कियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग टॉयलेट अनिवार्य

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी स्कूलों के लिए एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है, जिसमें क्लास 6 से 12 तक की लड़कियों के लिए मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में दिए गए जीवन और गरिमा के मौलिक अधिकार का हिस्सा है और इसे नजरअंदाज करना किसी भी स्कूल के लिए स्वीकार्य नहीं होगा. सिर्फ यह ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट और विकलांग बच्चों के लिए अनुकूल टॉयलेट सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है. यह आदेश देशभर के लाखों छात्राओं के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद जगाता है.

जया ठाकुर के PIL पर सुनवाई के दौरान आदेश

यह भी पढ़ें:नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र? देउबा गुट के प्रस्ताव से बढ़ी हलचल, बालेन शाह क्या करेंगे

यह आदेश जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया. याचिका में कहा गया कि कई सरकारी और प्राइवेट स्कूल लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराते. इससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार वे स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं. याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि कई परिवार मासिक धर्म उत्पाद खरीदने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे लड़कियों की स्वच्छता और शिक्षा दोनों प्रभावित होती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए कक्षा 6 से 12 तक की लड़कियों के स्वास्थ्य और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइन जारी की.

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

1. मुफ्त सैनिटरी पैड:

o सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं.

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o पैड स्कूल परिसर में वेंडिंग मशीन या जिम्मेदार अधिकारी के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएं.

o पैड ASTM D-694 मानकों के अनुसार होने चाहिए.

2. लड़कों और लड़कियों के अलग टॉयलेट:

o स्कूलों में अलग-अलग वॉशरूम सुनिश्चित किए जाएं.

o टॉयलेट में पानी की कनेक्टिविटी, साबुन और साफ-सफाई की सुविधा हमेशा उपलब्ध हो.

o मौजूदा और नए टॉयलेट की डिज़ाइन में प्राइवेसी और सुरक्षित पहुंच का ध्यान रखा जाए.

3. दिव्यांग बच्चों के लिए अनुकूल टॉयलेट:

o स्कूल में ऐसे टॉयलेट हों जो विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए उपयोगी हों.

o उन्हें आसानी से पहुंच और सुरक्षित इस्तेमाल की सुविधा हो.

4. मासिक धर्म प्रबंधन कॉर्नर:

o टॉयलेट के पास या स्कूल में एक मंथली हाइजीन कॉर्नर बनाया जाए.

o वहां एक्स्ट्रा यूनिफॉर्म, साबुन, पानी और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध हों.

5. अनुपालन न करने पर कार्रवाई:

o यदि कोई प्राइवेट स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है.

o सरकारें भी लड़कियों को टॉयलेट और सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में फेल हुईं, तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा.

मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत आता है.

• अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार – लड़कियों को पढ़ाई और गतिविधियों में बराबरी से हिस्सा लेने का अधिकार.

• अनुच्छेद 21: जीवन और गरिमा का अधिकार – मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना.

कोर्ट ने कहा कि यदि लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती, तो उनकी गरिमा, निजता और शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है.

समाज और स्कूलों के लिए संदेश

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है. यह समाज के हर वर्ग, माता-पिता, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक संदेश है. कोर्ट ने कहा कि लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति लापरवाही सामाजिक विकास के लिए हानिकारक है. साथ ही अदालत ने जोर देकर कहा कि मासिक धर्म को बोझ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. स्कूल और परिवार दोनों को मिलकर लड़कियों के स्वास्थ्य और गरिमा की सुरक्षा करनी होगी.

आदेश का संभावित प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल कानून का पालन सुनिश्चित करेगा बल्कि देश में लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव भी लाएगा. देशभर के लाखों स्कूल जाने वाली लड़कियों को फ्री सैनिटरी पैड और सुरक्षित टॉयलेट सुविधा मिलेगी. मासिक धर्म के कारण स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या घटेगी. छात्राओं की स्कूल उपस्थिति और पढ़ाई में सुधार होगा. यह आदेश सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा और लड़कियों के स्वास्थ्य व शिक्षा के अधिकार को मजबूत करेगा.

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