सुपौल सरकारी जमीन घोटाला: अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, जांच तेज गति से जारी
सुपौल में सरकारी जमीन घोटाले के मामले में सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई. अधिकारियों पर राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप है. जांच तेज गति से जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने साफ किया कि सरकारी संपत्ति से जुड़ी किसी भी अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.


Supaul: सरकारी जमीन से जुड़े गंभीर घोटाले के मामले में सुपौल सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई नूतन कुमारी के आवेदन के आधार पर की गई है, जिसमें राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी का आरोप लगाया गया है. मामला अंचल सुपौल के मौजा खरैल, खाता संख्या-458, खेसरा-1206 से जुड़ा है. आवेदन में दावा किया गया है कि यह भूमि पहले सरकार के लोक निर्माण विभाग के नाम दर्ज थी, जबकि मूल जमाबंदी संख्या-1187 में यह जमीन रैयत शशि तिवारी के नाम दर्ज थी. आरोप है कि 11 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन जमाबंदी पोर्टल पर राजस्व कर्मचारी विकास कुमार ने इसमें सुधार किया और 7 जनवरी 2026 को अंचल अधिकारी आनंद कुमार मंडल के स्तर से खाता व रकवा में बदलाव कर इसे रैयती जमाबंदी में अपडेट कर दिया गया. प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकारियों ने निजी स्वार्थ में सरकारी जमीन के अभिलेखों में हेरफेर किया, जो नियमों के खिलाफ है.
हेराफेरी और जिम्मेदार अधिकारी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खाता-318, खेसरा-1206 की जमीन को खाता-458, खेसरा-1206 और 2.4 डिसमिल सहित अन्य विवरणों में बदल दिया गया. अंचल अधिकारी सरकारी भूमि के संरक्षक होते हुए भी इस प्रकार की अनियमितता सामने आई. अपर समाहर्त्ता एवं अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी हुआ. सदर थाना में कांड संख्या 218/2026, दिनांक 23.03.2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं 318(4), 316(5), 338/336(3), 340(2) और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.
जांच और कार्रवाई
थानाध्यक्ष ने पुष्टि की है कि मामले की जांच तेज गति से जारी है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि सरकारी संपत्ति से जुड़ी किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. स्थानीय लोगों ने इस मामले पर चिंता जताई है और मांग की है कि दोषियों को कानून के तहत जल्द से जल्द दंडित किया जाए.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

झारखंड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका: 15.5% आदिवासी अब SC/ST आरक्षण और सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं

आय से अधिक संपत्ति मामले में शिवहर DDC बृजेश कुमार के ठिकानों पर छापेमारी, पैतृक गांव पहुंची टीम






Leave a comment