सुधाकर सिंह को 5 करोड़ का मानहानि नोटिस, कुंदन कृष्णन ने मांगी सार्वजनिक माफी
RJD सांसद सुधाकर सिंह को लेकर बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है. वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से उन्हें कथित तौर पर ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है.आखिर नोटिस की वजह क्या है और इस मामले में आगे क्या हो सकता है? जानिए पूरी खबर.

पटना:- बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में विवाद फिर चर्चा में है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन की ओर से पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि यह कानूनी कार्रवाई पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत को लेकर सांसद द्वारा उठाए गए सवालों के बाद हुई है. सुधाकर सिंह ने इस मामले में पुलिस की भूमिका और उस समय एसटीएफ के प्रमुख रहे कुंदन कृष्णन की भूमिका की जांच कराने की मांग की थी. नोटिस में इन आरोपों को गलत बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है. दूसरी ओर, सांसद ने कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस का जवाब देंगे, लेकिन माफी नहीं मांगेंगे. इस घटनाक्रम के बाद मामले की निष्पक्ष जांच, जनप्रतिनिधियों के सवाल और कानूनी कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है.
कुंदन कृष्णन की ओर से भेजा गया कानूनी नोटिस
जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने RJD सांसद सुधाकर सिंह को पांच करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. नोटिस में सांसद की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की गई है. हालांकि, नोटिस की विस्तृत शर्तों और कानूनी आधार की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से की जानी चाहिए.
भरत तिवारी एनकाउंटर पर सांसद ने उठाए थे सवाल
यह विवाद भोजपुर जिले में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत से जुड़ा है. सुधाकर सिंह ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. उन्होंने तत्कालीन एसटीएफ प्रमुख कुंदन कृष्णन की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की थी. इन्हीं बयानों को लेकर मानहानि नोटिस भेजे जाने की बात कही जा रही है.
सांसद बोले- कानूनी तरीके से देंगे जवाब
नोटिस मिलने के बाद सुधाकर सिंह ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब देने की बात कही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सार्वजनिक माफी नहीं मांगेंगे. सांसद का कहना है कि मानहानि के मुकदमे की चेतावनी से वह जनहित से जुड़े सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे.
17 जून को मुठभेड़ में हुई थी भरत तिवारी की मौत
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी. मृतक के परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी. इस मामले में मुठभेड़ की परिस्थितियों और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं.
न्यायिक जांच के आदेश का भी हुआ था जिक्र
खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे. हालांकि, जांच की मौजूदा स्थिति और उससे जुड़े आधिकारिक निष्कर्षों की पुष्टि जरूरी है. पांच करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस के बाद अब सबकी नजर सांसद के कानूनी जवाब और मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर है.


