अतिक्रमण पर सख्ती, पर भूमिहीनों के लिए पुनर्वास जरूरी: बाबूलाल मरांडी
“झारखंड विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अतिक्रमण कर घर बनाकर रह रहा है, लेकिन वह भूमिहीन है, तो सरकार को उसे उजाड़ने के बजाय बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए.”

Ranchi: झारखंड विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अतिक्रमण कर घर बनाकर रह रहा है, लेकिन वह भूमिहीन है, तो सरकार को उसे उजाड़ने के बजाय बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन है और उन्होंने जबरन वन भूमि या सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, उनका मामला अलग है.
मरांडी ने कहा कि ऐसे गरीब परिवार जिनके पास घर बनाने तक के लिए जमीन नहीं है, उनके प्रति सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि भूमिहीन परिवारों को दो डिसमिल से अधिक जमीन दी जानी चाहिए. ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीब परिवार अपने घर में ही बकरी, सूअर, गाय और मुर्गी पालते हैं. ऐसे में उन्हें इतनी जमीन मिलनी चाहिए कि पशुपालन के साथ-साथ वे सब्जी भी उगा सकें.
यह मामला राजद विधायक प्रकाश राम द्वारा ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया गया. प्रकाश राम ने कहा कि लातेहार जिले में 40-50 वर्षों से बसे गरीब परिवारों को हटाया जा रहा है. चंदनडीह में 266 लोगों को बेदखल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना उजाड़ना उचित नहीं है.
उन्होंने बताया कि पहले हटाए गए 138 परिवारों को दो-दो डिसमिल जमीन दी गई है, लेकिन वह जमीन ऐसी जगह पर है जहां सरना पूजा होती है और मेला लगता है, जिससे लोग वहां बसना नहीं चाहते. इसके अलावा 155 भूमिहीन परिवार अभी भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में सीओ द्वारा किया गया एफिडेविट भी गलत है.
वहीं, विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि सरकार सात डिसमिल तक जमीन का बंदोबस्त कर सकती है, लेकिन जबरन जमीन पर कब्जा करने वालों के लिए बंदोबस्ती का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने आश्वासन दिया कि उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

