अजय महतो के बाद पत्नी बबीता के सरेंडर की चर्चा तेज, क्या झारखंड में माओवाद को लगा एक और बड़ा झटका?
25 लाख के इनामी माओवादी अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी बबीता के सरेंडर की खबरों ने नई चर्चा छेड़ दी है. हालांकि झारखंड पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. यदि खबर सही साबित होती है तो इसे माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा सकता है.

Ranchi: झारखंड में 25 लाख रुपये के इनामी हार्डकोर माओवादी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी पत्नी बबीता को लेकर भी बड़ी चर्चा शुरू हो गई है. मीडिया रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से खबर सामने आ रही है कि बबीता ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है. हालांकि इस संबंध में अभी तक झारखंड पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. अजय महतो की गिरफ्तारी को पहले ही माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ऐसे में अगर बबीता के सरेंडर की खबर की भी पुष्टि होती है तो इसे सुरक्षा एजेंसियों की एक और बड़ी सफलता माना जाएगा. वहीं इस घटनाक्रम के बाद झारखंड में माओवादी नेटवर्क और संगठन की मौजूदा स्थिति को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है.
अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद क्यों चर्चा में आई बबीता?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अजय महतो पिछले कई वर्षों से झारखंड के सबसे सक्रिय और वांछित माओवादी नेताओं में शामिल था. उस पर हत्या, लेवी वसूली, पुलिस पर हमले और विस्फोट जैसी कई गंभीर घटनाओं के आरोप हैं. उसकी गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद यह खबर सामने आने लगी कि उसकी पत्नी बबीता ने भी हथियार छोड़ दिए हैं. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. माना जा रहा है कि अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद संगठन के भीतर भी दबाव बढ़ा है, जिसका असर दूसरे कैडरों पर भी पड़ सकता है.
अगर बबीता ने सरेंडर किया तो माओवादी संगठन पर क्या पड़ेगा असर?
बबीता को लंबे समय से अजय महतो के साथ संगठन में सक्रिय माना जाता रहा है. ऐसे में अगर उसके आत्मसमर्पण की खबर सही साबित होती है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं होगा, बल्कि माओवादी संगठन के मनोबल पर भी बड़ा असर डाल सकता है. पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार अभियान चलाकर कई बड़े नक्सली नेताओं को गिरफ्तार या ढेर कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर भी कर चुके हैं. ऐसे में अजय महतो की गिरफ्तारी और बबीता के संभावित सरेंडर को उसी कड़ी की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
अब पुलिस की आधिकारिक पुष्टि पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा इंतजार झारखंड पुलिस के आधिकारिक बयान का है. सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर लगातार कार्रवाई जारी है और माना जा रहा है कि जल्द ही पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जानकारी साझा की जा सकती है. अगर बबीता के सरेंडर की पुष्टि होती है तो यह झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी उपलब्धि होगी. वहीं अगर खबर गलत साबित होती है तो पुलिस स्थिति स्पष्ट करेगी. फिलहाल अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद बबीता को लेकर चल रही चर्चाओं ने सुरक्षा और राजनीतिक हलकों में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है.

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