भिवाड़ी हाईवे हादसे में 7 मजदूरों की मौत, झारखंड के दो युवक भागीरथ और संजीव भी शामिल, गांव में मातम छाया
“हरियाणा के भिवाड़ी (गुरुग्राम बॉर्डर) में Signature Global सोसाइटी की निर्माणाधीन साइट पर सोमवार रात बड़ा हादसा हुआ. एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की खुदाई के दौरान मिट्टी और दीवार अचानक ढह गई, जिससे 7 मजदूर मलबे में दब गए. मृतकों में झारखंड के पोटका प्रखंड के दो युवक भी शामिल हैं.”

हरियाणा के भिवाड़ी इलाके में हुए हादसे में 7 मजदूर मलबे में दबकर मारे गए, जबकि 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. मृतकों में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के पोहीत गांव के दो युवक – भागीरथ गोप और संजीव गोप – भी शामिल हैं. ये दोनों कुछ महीनों पहले ही परिवार की बेहतरी के लिए हरियाणा में मजदूरी करने पहुंचे थे. हादसे की खबर गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई, जहां परिवार वाले अब मुआवजे और शवों को घर लाने की मांग कर रहे हैं. हरियाणा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की लापरवाही का संकेत मिला है.
मिट्टी धंसने से दीवार ढही, मजदूर दबे
भिवाड़ी के सिधरावली इलाके में Signature Global कंपनी के आवासीय प्रोजेक्ट पर एसटीपी यूनिट का काम चल रहा था. मजदूरों का एक ग्रुप रात के समय खुदाई और कंक्रीट वर्क कर रहा था, तभी मिट्टी का बड़ा हिस्सा अचानक गिर पड़ा. इससे दीवार टूट गई और 10-15 मजदूर मलबे के नीचे दब गए. मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ टीम ने जेसीबी और अन्य मशीनों से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. कई घंटों की मशक्कत के बाद 7 शव निकाले गए, जिन्हें भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया. घायल चार मजदूरों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो की हालत नाजुक बताई जा रही है.
भागीरथ और संजीव के परिवार की उम्मीदें चकनाचूर
पोटका के पोहीत गांव में गोप परिवार की जिंदगी गरीबी और संघर्ष से भरी रही है. भागीरथ गोप (लगभग 28 वर्ष) विवाहित थे और दो छोटे बच्चों के पिता. वे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पत्नी और बच्चों को गांव छोड़कर हरियाणा गए थे. संजीव गोप (लगभग 25 वर्ष) उनके चचेरे भाई थे और परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य. दोनों ने साइट पर दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम शुरू किया, जहां वे रोजाना 800-1000 रुपये कमा रहे थे. गांव वालों के अनुसार, भागीरथ कर्ज चुकाने की जद्दोजहद में थे, जबकि संजीव घर की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे. मौत की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया – भागीरथ की पत्नी और मां रो-रोकर बेहाल, संजीव की मां ने सदमे में बेहोशी की शिकायत की. ग्रामीण और स्थानीय नेता परिवारों के घर पहुंचे, जहां शोक सभा बुलाई गई. लोग झारखंड सरकार से 5-10 लाख मुआवजे, शवों को ट्रांसपोर्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.
मजदूरों की जिंदगी खतरे में
यह हादसा देश में प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित कामकाजी स्थितियों को फिर उजागर कर रहा है. जांच में पता चला कि साइट पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या मिट्टी की टेस्टिंग जैसी बेसिक सुविधाएं नहीं थीं. मजदूर यूनियनों का कहना है कि कंपनियां सस्ते ठेकेदारों से काम करवाती हैं, जिससे रिस्क बढ़ जाता है. हरियाणा लेबर विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी किया और साइट पर काम रोक दिया.

