अवैधानिक कैडर रिव्यू कमेटी भंग करने की मांग, सचिवालय सेवा संघ का सरकार पर दबाव
“झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने कैडर रिव्यू कमेटी को भंग करने और उप सचिव व संयुक्त सचिव पदों के सृजन के पुराने प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग की है. संघ ने विरोध प्रदर्शन का भी ऐलान किया है.”

Ranchi: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की है. संघ ने राजस्व परिषद सदस्य की अध्यक्षता में गठित कैडर रिव्यू कमेटी को अवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल भंग करने की मांग की है. इसके साथ ही संघ ने सरकार से पुराने प्रस्ताव को मंजूरी देने की अपील की है, जिसमें उप सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के सृजन का मामला शामिल है. संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव को पहले ही मुख्यमंत्री स्तर पर सहमति मिल चुकी है, लेकिन अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं दी गई है. इस मुद्दे को लेकर संघ ने विरोध प्रदर्शन का भी ऐलान किया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
कैडर रिव्यू कमेटी पर सवाल
संघ के नेताओं ने कहा कि राज्य में गठित कैडर रिव्यू कमेटी विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना बनाई गई है. उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के नियमों और ढांचे को अपनाए बिना ही राज्य स्तर पर इस कमेटी का गठन कर दिया गया. संघ का कहना है कि यदि कैडर रिव्यू करना था, तो पहले केंद्र के अनुरूप नियमों को लागू करना जरूरी था. ऐसे में मौजूदा कमेटी को अवैधानिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की गई है.
पद सृजन के प्रस्ताव पर अटका मामला
संघ के अनुसार सचिवालय सेवा के ढांचे को मजबूत करने के लिए उप सचिव के 41 और संयुक्त सचिव के 24 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है. इस प्रस्ताव को संबंधित मंत्री स्तर पर सहमति भी मिल चुकी थी और अब केवल अंतिम मंजूरी बाकी है. लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो रही है. संघ ने यह भी कहा कि प्रशासी पदवर्ग समिति के पास गई फाइल को वापस मंगाना प्रक्रिया में हस्तक्षेप और अधिकारों के दुरुपयोग जैसा है.
28 अप्रैल को विरोध
संघ ने अपनी मांगों के समर्थन में 28 अप्रैल को कैबिनेट बैठक के दौरान प्रोजेक्ट भवन में मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र भी सौंपा गया है, जिसमें सेवा शर्तों और वर्तमान स्थिति का उल्लेख किया गया है. संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा. फिलहाल, इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

