सरायकेला: गम्हरिया खाद्य गोदाम में खराब हुई पीडीएस की दाल, गरीबों के राशन वितरण पर उठे गंभीर सवाल
सरायकेला के गम्हरिया स्थित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम में पीडीएस के तहत रखी गई दाल खराब होने का मामला सामने आया है. समय पर वितरण नहीं होने और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत रखी गई दाल के खराब होने का मामला सामने आया है. यह दाल आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र लाभुकों के बीच वितरण के लिए सुरक्षित रखी गई थी, लेकिन समय पर वितरण नहीं होने और उचित भंडारण व्यवस्था की कमी के कारण इसके खराब होने की बात कही जा रही है. इस घटना ने सरकारी खाद्यान्न प्रबंधन और वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि विभाग समय रहते दाल का वितरण कर देता, तो सरकारी संसाधनों की बर्बादी रोकी जा सकती थी और जरूरतमंद परिवारों को समय पर उनका अधिकार मिल जाता. मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई है और लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
समय पर वितरण नहीं होने से बढ़ी समस्या
जानकारी के अनुसार, पीडीएस के तहत वितरित की जाने वाली दाल लंबे समय तक गम्हरिया के खाद्य गोदाम में रखी रही. निर्धारित समय पर इसका वितरण नहीं होने से दाल की गुणवत्ता प्रभावित हुई. स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि खाद्यान्न पहले ही लाभुकों तक पहुंचा दिया जाता, तो इस तरह के नुकसान से बचा जा सकता था.
भंडारण व्यवस्था पर उठे सवाल
खाद्यान्न के सुरक्षित रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है. ऐसे में गोदाम में रखी दाल के खराब होने की खबर ने भंडारण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्यान्न को सुरक्षित रखने के लिए तापमान, नमी और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होती हैं. यदि इनमें लापरवाही बरती जाए तो खाद्यान्न खराब होने की संभावना बढ़ जाती है.
लाभुकों को नहीं मिला समय पर उनका अधिकार
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दाल गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आवंटित की गई थी. लेकिन वितरण में देरी के कारण पात्र लाभुकों को समय पर राशन नहीं मिल सका. इससे जरूरतमंद परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा. लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब खाद्यान्न समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे.
विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया. अधिकारियों की ओर से टिप्पणी नहीं किए जाने के कारण लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. पारदर्शिता की मांग कर रहे नागरिकों का कहना है कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके.
जांच और जवाबदेही की उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही यह भी अपेक्षा जताई जा रही है कि जिन लाभुकों को यह दाल मिलनी थी, उन्हें जल्द वैकल्पिक खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए. इस तरह की घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों, इसके लिए खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

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